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सबसे सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री पर आ गया हाईकोर्ट का फैसला

आरुषि हत्याकांडनई दिल्ली। देश की सबसे सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री आरुषि हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुना दिया है। इस हत्याकांड के 9 साल बाद आज हाईकोर्ट का फैसला आया है। कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई के फैसले को पलटते हुए डा. राजेश तलवार और नुपुर तलवार को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है।

इस मामले में आरोपी दंपती डा. राजेश तलवार और नुपुर तलवार ने सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद की ओर से आजीवन कारावास की सजा के खिलाफ इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील दाखिल की थी।

गाजियाबाद स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने 26 नवंबर, 2013 को राजेश और नुपुर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसी के खिलाफ तलवार दंपति ने हाईकोर्ट में इस सजा के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सात सितंबर को खंडपीठ ने तलवार दंपति की अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

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दोनों इस समय गाजियाबाद के डासना जेल में सजा काट रहे हैं। इसी वजह से बुधवार को तलवार दंपति की रात बेचैनी में कटी है। उन्हें उम्मीद थी कि कोर्ट उन्हें निर्दोष मानते हुए रिहा कर देगा।

मालूम हो कि डा. तलवार की नाबालिग पुत्री आरुषि की हत्या 15-16 मई 2008 की रात नोएडा के सेक्टर 25 स्थित घर में ही कर दी गई थी।

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केस पर एक नज़र

मई, 2008 में नोएडा के जलवायु विहार इलाके में 14 साल की आरुषि का शव उसके मकान में बरामद हुआ था। शुरुआत में शक की सुई हेमराज की ओर गई, लेकिन दो दिन बाद मकान की छत से उसका भी शव बरामद किया गया। उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने मामले की जांच प्रदेश की पुलिस से लेकर सीबीआई को सौंपी थी। मामले में पुलिस की लापरवाही भी पूरे देश में चर्चा का विषय रही थी।

विवेचना के दौरान घर की छत पर उनके घरेलू नौकर हेमराज का शव भी पाया गया था। सीबीआइ ने सीधा सुबूत न मिलने के कारण क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन सीबीआइ कोर्ट ने उस पर संज्ञान लेते हुए तलवार दंपती के खिलाफ मुकदमा चलाया और उन्हें हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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