
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से संपत्ति विवाद और अपहरण का एक ऐसा खौफनाक मामला प्रकाश में आया है, जिसने पूरे शहर में सनसनी फैला दी है। यह पूरा विवाद शहर के बेहद प्रतिष्ठित सिंघानिया परिवार की बेशकीमती पैतृक संपत्ति से जुड़ा हुआ है।
आरोप है कि करोड़ों रुपये की इस संपत्ति पर अवैध कब्जा जमाने की नीयत से कुछ रसूखदार बिल्डरों और उनके सहयोगियों ने एक गहरी साजिश रची। इस साजिश के तहत परिवार के वारिस प्रणव सिंघानिया को अगवा कर लिया गया और उन्हें लगभग दो साल तक बंधक बनाकर रखा गया, जहां उन्हें लगातार नशीले पदार्थ और इंजेक्शन देकर अचेत रखा जाता था।
स्वरूप नगर थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी में इस पूरी साजिश को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। पीड़ित परिवार के अनुसार, लालची आरोपियों ने प्रणव सिंघानिया को स्वरूप नगर इलाके के अलग-अलग दफ्तरों और होटलों में कैद करके रखा था। इस लंबी अवधि के दौरान उन्हें भारी मात्रा में नशीली दवाइयां और इंजेक्शन दिए जाते रहे, ताकि वे अपना मानसिक संतुलन खो बैठें।
इसी अर्धबेहोशी और मानसिक विक्षिप्तता की हालत का क्रूरता से फायदा उठाते हुए आरोपियों ने कूपरगंज स्थित करोड़ों की बहुमूल्य पैतृक संपत्ति की जबरन अपने नाम रजिस्ट्री करवा ली। इसके अलावा, साजिशकर्ताओं ने चालाकी से प्रणव के कई सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवा लिए और जबरन अंगूठे के निशान भी ले लिए।
इस भयानक षड्यंत्र का पर्दाफाश उस वक्त हुआ जब प्रणव के बड़े भाई अद्वैत पत सिंघानिया को अपने भाई के साथ हो रहे इस अमानवीय कृत्य की भनक लगी। जब अद्वैत ने इस पूरी साजिश का कड़ा विरोध किया और आरोपियों को बेनकाब करने की कोशिश की, तो रसूखदार भू-माफियाओं ने उनके साथ भी बुरी तरह मारपीट की और उन्हें जान से मारने की धमकियां दीं।
मामले की गंभीरता और परिवार की शिकायत के बाद कानपुर पुलिस हरकत में आई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मामले में शहर के कई नामी बिल्डरों सहित चार नामजद और दस से बारह अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर आपराधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। फिलहाल, इस पूरे षड्यंत्र में शामिल अन्य फरार बिल्डरों, उनके सहयोगियों और अज्ञात गुर्गों की तलाश में पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।



