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‘इंडिया’ गठबंधन के प्रदर्शन पर चिराग पासवान की सलाह, कहा- सड़क पर उतरने के बजाय चुनाव आयोग से बातचीत करे विपक्ष

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने गुरुवार को लखनऊ में चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने वाले राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे रोजाना सड़क पर विरोध प्रदर्शन करने के बजाय चुनाव आयोग के समक्ष अपनी चिंताएं रखें और संवाद के माध्यम से समाधान निकालें। उन्होंने विपक्ष के शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान किया, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठाया कि क्या बार-बार किए जा रहे इन प्रदर्शनों का उद्देश्य वास्तव में कोई समाधान खोजना है या फिर केवल बाधा और अव्यवस्था उत्पन्न करना है।

पासवान ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है, इसलिए राजनीतिक दल इसके अधिकारियों से मिलकर अपनी शिकायतें सौंप सकते हैं और स्पष्टीकरण मांग सकते हैं। उन्होंने बताया कि अतीत में उन्होंने भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर चिंताएं जताई थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने बिंदुवार तरीके से सभी आरोपों का जवाब दिया था। उन्होंने चुनाव प्रणाली में जनता का विश्वास बनाए रखने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।

इस बीच, राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। कनॉट प्लेस में आयोजित एक बैठक के बाद विपक्षी दलों के सांसद और कांग्रेस कार्यकर्ता अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए राजघाट की ओर रवाना हुए। समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कहा कि सभी सांसद शांतिपूर्ण धरने के लिए निर्धारित स्थल पर जाएंगे।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन ईश्वर से प्रार्थना करेगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इस बात का अहसास हो कि उनके कदम और नीतियां देश के हित में नहीं हैं। विपक्ष की योजना इस वृहद प्रदर्शन के जरिए मुख्य रूप से कथित ‘वोट चोरी’, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और नागरिकों के अधिकारों के हनन जैसे गंभीर मुद्दों को जोर-शोर से उठाने की है।

इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग 300 सांसदों को चुनाव आयोग के कार्यालय के बाहर और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से बलपूर्वक रोका गया, और इस दौरान कुछ नेताओं के साथ धक्का-मुक्की तथा बदसलूकी भी की गई।

इसी परिप्रेक्ष्य में, 42 पूर्व न्यायाधीशों ने भी एक साझा बयान जारी कर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमतर आंकने और उन्हें कमजोर करने के प्रयासों के प्रति अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है। वर्तमान तनावपूर्ण हालात और विपक्षी दलों के आक्रामक रुख को देखते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। मौके पर रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों की भारी तैनाती की गई है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए दंगा नियंत्रण वाहनों को भी मुस्तैद रखा गया है।

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