
देश की राजधानी में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। कांग्रेस की कड़ी आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने आरोप लगाया कि देश में चुनी हुई सरकारों को बार-बार गिराने, अपने हिसाब से चुनाव आयुक्तों को बदलने और देश पर आपातकाल थोपने का अलोकतांत्रिक इतिहास कांग्रेस का ही रहा है।
उन्होंने कहा कि आज यही पार्टी पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था का माहौल पैदा करने की कोशिश कर रही है। धामी ने स्पष्ट किया कि देश की जागरूक जनता कांग्रेस के इन असली इरादों को भली-भांति समझती है और वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अपना पूरा विश्वास जताते हुए उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन लगातार अपने चरम की ओर बढ़ रहा है। दिल्ली के कनॉट प्लेस में आयोजित एक लंच मीटिंग के बाद ‘इंडिया’ गठबंधन के सांसद और कांग्रेस कार्यकर्ता अपने आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए राजघाट की ओर रवाना हुए। इस मौके पर समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने स्पष्ट किया कि सभी विपक्षी सांसद शांतिपूर्ण तरीके से धरने पर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
इसी बीच, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनका गठबंधन प्रार्थना करेगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को इस बात का अहसास हो कि उनके वर्तमान कार्य और नीतियां देश के हित में नहीं हैं। विपक्षी दल इस वृहद प्रदर्शन के माध्यम से मुख्य रूप से कथित ‘वोटों की चोरी’, बढ़ती महंगाई, बेलगाम बेरोजगारी और नागरिकों के अधिकारों के हो रहे हनन जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्र के पटल पर रख रहे हैं।
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि लगभग 300 सांसदों को चुनाव आयोग के बाहर और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से बलपूर्वक रोका गया और इस दौरान कुछ नेताओं के साथ बदसलूकी व धक्का-मुक्की भी की गई। वहीं दूसरी तरफ, 42 पूर्व न्यायाधीशों ने भी एक साझा बयान जारी कर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को कमतर आंकने और उन्हें कमजोर करने के प्रयासों के प्रति अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी है।
वर्तमान हालात और विपक्षी दलों के आक्रामक रुख को देखते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गई है। वहां रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के जवानों की भारी तैनाती की गई है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए दंगा नियंत्रण वाहनों को पूरी तरह से मुस्तैद रखा गया है।




