
उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पुलिस विभाग को एक बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हाथ लगी है। मुगलसराय कोतवाली पुलिस, स्वाट (SWAT) टीम और साइबर सेल के संयुक्त अभियान के तहत एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम सिंडिकेट का पर्दाफाश किया गया है।
पुलिस टीमों ने एक गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक अवैध कॉल सेंटर पर अचानक छापेमारी की। इस सघन अभियान के दौरान मौके से पांच शातिर साइबर अपराधियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया है, जबकि इस पूरे नेटवर्क से जुड़े तीन अन्य आरोपियों को नामजद कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
यह गिरोह मुख्य रूप से सात समंदर पार बैठे विदेशी नागरिकों को अपने जाल में फंसाता था। इनके निशाने पर विशेष रूप से जापान के रहने वाले बुजुर्ग और तकनीकी रूप से कम जानकार नागरिक होते थे। जांच और पूछताछ में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि ये ठग विदेशी नागरिकों को उनके कंप्यूटर या लैपटॉप में गंभीर वायरस होने या किसी बड़ी तकनीकी खराबी का डर दिखाते थे।
इसके बाद ‘टेक्निकल सपोर्ट’ या सहायता देने के बहाने से वे पीड़ितों से संपर्क साधते थे। विश्वास में लेने के बाद, ये शातिर अपराधी पीड़ितों के सिस्टम में एनीडेस्क (AnyDesk) या टीमव्यूअर (TeamViewer) जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करवा देते थे, जिससे उन्हें उनके डिवाइस का पूरा नियंत्रण घर बैठे ही मिल जाता था।
रिमोट एक्सेस हासिल करने के बाद यह गिरोह बड़ी ही चालाकी से पीड़ितों के इंटरनेट बैंकिंग के गोपनीय क्रेडेंशियल्स और पासवर्ड चुरा लेता था। विदेशी नागरिकों के सिस्टम में सेंधमारी करने के बाद, उनके खातों से पलक झपकते ही मोटी रकम उड़ा ली जाती थी और उसे भारतीय खातों में ट्रांसफर कर लिया जाता था। इस गंभीर मामले में पुलिस ने बेहद तत्परता दिखाते हुए वित्तीय हेराफेरी पर रोक लगाने के उद्देश्य से एक आरोपी के बैंक खाते में मौजूद लगभग नौ लाख रुपये की संदिग्ध राशि को तत्काल प्रभाव से फ्रीज करवा दिया है।
अवैध रूप से संचालित इस कॉल सेंटर पर की गई छापेमारी में पुलिस के हाथ ठगी के काम में इस्तेमाल होने वाला भारी तकनीकी साजो-सामान लगा है। पुलिस ने मौके से 19 मॉनिटर, 20 सीपीयू, 3 लैपटॉप और 6 मोबाइल फोन सहित कई अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं।
इन उपकरणों के जरिए ही हाईटेक तरीके से इस पूरे गोरखधंधे को अंजाम दिया जा रहा था। फिलहाल, गिरफ्तार किए गए सभी आरोपियों से पुलिस की विशेष टीमें गहनता से पूछताछ कर रही हैं ताकि इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े अन्य सफेदपोश चेहरों को बेनकाब किया जा सके। इसके साथ ही, गिरोह के मुख्य सरगना (किंगपिन) को दबोचने के लिए पुलिस की कई टीमें अलग-अलग संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं।



