
आगरा के एत्माद्दौला थाना क्षेत्र स्थित ट्रांस यमुना फेस-द्वितीय के श्री कृष्णा अस्पताल में चिकित्सा में घोर लापरवाही का एक बेहद गंभीर और हृदय विदारक मामला सामने आया है। अस्पताल में एक प्रसूता की मौत के महज दो दिन बाद उसके जुड़वा बच्चों में से एक की भी मौत हो जाने पर परिजनों का आक्रोश फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया।
परिजनों का सीधा आरोप है कि डॉक्टरों की घोर लापरवाही के कारण जच्चा और बच्चा दोनों की जान गई है। स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब परिजनों ने यह सनसनीखेज दावा किया कि अस्पताल प्रबंधन ने पैसों के लालच में उनकी मृत बच्ची को भी वेंटिलेटर पर रखा हुआ है, जबकि अस्पताल प्रशासन केवल बेटे की मौत की पुष्टि कर रहा है।
इस दर्दनाक घटना की पृष्ठभूमि में एक लंबा पारिवारिक संघर्ष छिपा है। एटा जिले के बागवाला क्षेत्र स्थित गढ़ी बड़ेल के रहने वाले अजीत कुमार यादव और उनकी पत्नी मंजू देवी की शादी को करीब तीस साल बीत चुके थे, लेकिन उनके आंगन में कोई किलकारी नहीं गूंजी थी। परिजनों के अनुसार, करीब डेढ़ साल पहले एक रिश्तेदार के माध्यम से उनकी मुलाकात श्री कृष्णा अस्पताल की डॉ. गीता यादव से हुई थी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज का पूरा जिम्मा लेते हुए इस डेढ़ साल की अवधि में उनसे करीब 11 लाख रुपये की भारी-भरकम रकम वसूल ली।
बीते सोमवार को जब मंजू देवी की तबीयत अचानक बिगड़ी, तो उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। रात करीब नौ बजे हुए ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और कथित तौर पर लापरवाही के चलते मंजू की जान चली गई। इसी दौरान मंजू ने एक बेटे और एक बेटी को जन्म दिया, जिन्हें जन्म के तुरंत बाद वेंटिलेटर पर रख दिया गया था। उस रात परिजनों को न तो बच्चों से और न ही मंजू से मिलने दिया गया, जिसके बाद वे हताश होकर मंजू का शव घर ले गए और भारी मन से उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
बुधवार की सुबह जब परिजन वापस अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें अस्पताल प्रबंधन की ओर से करीब एक लाख रुपये का नया बिल थमा दिया गया और साथ ही नवजात बेटे की मौत की मनहूस खबर दी गई। इस खबर ने परिजनों के सब्र का बांध तोड़ दिया और उन्होंने यह आरोप लगाते हुए अस्पताल के बाहर उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया कि उनकी नवजात बच्ची की भी मौत हो चुकी है, लेकिन अस्पताल का बिल बढ़ाने के लिए उसे जबरन वेंटिलेटर पर जिंदा बताकर रखा गया है।
करीब दो घंटे तक चले इस भारी ड्रामे और हंगामे की सूचना मिलते ही एसीपी छत्ता श्वेता वर्मा के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर पहुंचा और आक्रोशित परिजनों को समझा-बुझाकर किसी तरह शांत कराया। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परिजनों की ओर से औपचारिक लिखित शिकायत मिलने पर मामले की गहनता से जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
दूसरी ओर, श्री कृष्णा अस्पताल के संचालक डॉ. अरविंद यादव ने परिजनों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह निराधार बताया है। अस्पताल प्रबंधन का अपना बचाव करते हुए कहना है कि इलाज शुरू करने से पहले ही परिजनों को जच्चा-बच्चा की नाजुक स्थिति और उससे जुड़े सभी मेडिकल जोखिमों के बारे में स्पष्ट रूप से बता दिया गया था। डॉ. यादव के मुताबिक, महिला को जब अस्पताल लाया गया था, तब उसे पहले से ही अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन के बाद दोनों बच्चों का जन्म सुरक्षित तरीके से हुआ था, लेकिन समय से पहले जन्म (प्रीमैच्योर डिलीवरी) होने के कारण उनके आंतरिक अंग पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाए थे। अस्पताल प्रशासन का दावा है कि बुधवार को केवल एक नवजात की दुखद मौत हुई है, जबकि दूसरा बच्चा अभी जीवित है और उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है।



