
भारत की स्टार एथलीट और मेरठ की रहने वाली धावक पारुल चौधरी ने एशियन गेम्स 2026 में अपने उत्कृष्ट खेल कौशल का प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर देश का गौरव बढ़ाया है। अपनी निरंतरता और अदम्य साहस के दम पर पारुल ने इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर महज तीन दिनों के अंतराल में दो कांस्य पदक अपनी झोली में डालकर एक नया मुकाम हासिल किया है। उनकी इस शानदार सफलता से पूरे भारतीय खेल जगत में खुशी की लहर है।
रविवार को आयोजित हुई महिलाओं की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में पारुल ने अपनी गति और सहनशक्ति का अद्भुत तालमेल दिखाया। इस बेहद चुनौतीपूर्ण रेस को उन्होंने 9 मिनट 8.67 सेकंड के शानदार समय के साथ पूरा किया और तीसरे स्थान पर रहते हुए कांस्य पदक पर कब्जा जमाया। इस रेस की सबसे खास बात यह रही कि पारुल ने न केवल अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन (पर्सनल बेस्ट) निकाला, बल्कि एक नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी स्थापित किया, जो उनके कड़े अभ्यास और खेल के प्रति गहरे समर्पण को दर्शाता है।
स्टीपलचेज के कड़े मुकाबले के ठीक अगले दिन, यानी सोमवार को पारुल एक बार फिर ट्रैक पर उतरीं और महिलाओं की 5000 मीटर लंबी दूरी की दौड़ में भी अपना जलवा बिखेरा। उन्होंने शारीरिक थकान को दरकिनार करते हुए 15 मिनट 14.61 सेकंड के बेहतरीन समय के साथ रेस पूरी की और इस स्पर्धा में भी कांस्य पदक हासिल किया। इतनी जल्दी रिकवर होकर लगातार दो कठिन अंतरराष्ट्रीय रेस में पदक जीतना उनकी असाधारण शारीरिक और मानसिक मजबूती का परिचायक है।
पारुल चौधरी की यह दोहरी सफलता इसलिए भी अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक है क्योंकि उनका ट्रैक रिकॉर्ड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार शानदार रहा है। इससे पहले वर्ष 2023 में चीन के हांगझोउ में आयोजित एशियन गेम्स में भी पारुल ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 5000 मीटर रेस में स्वर्ण पदक और 3000 मीटर स्टीपलचेज में रजत पदक जीतकर इतिहास रचा था।
मेरठ की इस होनहार बेटी ने अपनी निरंतरता से यह साबित कर दिया है कि वह लंबी दूरी की दौड़ में एशिया की सर्वश्रेष्ठ एथलीटों में से एक हैं। लगातार दो एशियन गेम्स में पदकों की झड़ी लगाकर पारुल ने भारतीय एथलेटिक्स की दुनिया में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी है।



