उत्तराखंड

‘आपदाओं के लिए विकास को दोष नहीं दे सकते’: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुनियादी ढांचे, चुनाव और विपक्ष के दावों पर कहा ये

आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनावों से पहले, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है, राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कई अहम और ज्वलंत मुद्दों पर अपनी सरकार का रुख स्पष्ट किया है।

एक साक्षात्कार में उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं, चार धाम विकास परियोजना, बेरोजगारी और विपक्षी दलों के राजनीतिक दांव-पेच पर विस्तार से बात की। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस द्वारा हल्द्वानी ‘शुद्धिकरण’ विवाद को लेकर बनाए जा रहे दलित नैरेटिव को भी सिरे से खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि वहां इस तरह की कोई भी घटना नहीं हुई थी।

चुनावों की तैयारियों और राज्य के बुनियादी ढांचे पर बात करते हुए धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखंड ने विकास के नए आयाम छुए हैं। उन्होंने ऑल-वेदर चार धाम सड़क, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन और एम्स जैसे चिकित्सा संस्थानों की स्थापना का विशेष रूप से उल्लेख किया। इसके अलावा, उन्होंने देहरादून हवाई अड्डे के विस्तार सहित हवाई सेवाओं में हुए सुधारों को भी सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया।

जब उनसे ढांचागत विकास के कारण पर्यावरण को होने वाले नुकसान और हालिया प्राकृतिक आपदाओं के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी (इकोलॉजी) के बीच संतुलन बनाए रखने का पूरा प्रयास किया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य के लोगों को बादल फटने या अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड) जैसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि राज्य में कहीं भी बेतरतीब या अनियोजित निर्माण नहीं हुआ है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं उन सुदूर और दुर्गम इलाकों में भी हुई हैं जहां अब तक कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। धामी ने तर्क दिया कि उत्तराखंड अपने 71 प्रतिशत वन क्षेत्र के साथ देश के पर्यावरण की रक्षा करता है, और बढ़ते वैश्विक तापमान व जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली आपदाओं के लिए विकास कार्यों को दोष देना उचित नहीं है।

राज्य में बेरोजगारी को लेकर युवाओं के विरोध प्रदर्शनों पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में 35,000 से अधिक युवाओं को पूरी तरह से पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त तरीके से रोजगार प्रदान किया है। उन्होंने बताया कि भर्ती प्रक्रिया को साफ-सुथरा रखने के लिए सरकार ने परीक्षाओं में नकल और धांधली रोकने के कड़े कानून लागू किए हैं, जिसके तहत नकल माफिया से जुड़े लगभग 100 लोगों को सलाखों के पीछे भेजा गया है।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रही राष्ट्रीय राजनीतिक बहस पर धामी ने चुनाव आयोग का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने इसे एक संवैधानिक प्रक्रिया करार दिया, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची से फर्जी, मृत या स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाकर उसे पारदर्शी बनाना है। विपक्ष द्वारा खड़े किए जा रहे सवालों पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी चुनावी हार देखते हैं, वे उसे सही ठहराने के लिए अक्सर चुनाव आयोग या इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर दोष मढ़ने लगते हैं।

अंकिता भंडारी हत्याकांड और हल्द्वानी विवाद पर बोलते हुए धामी ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपना राजनीतिक आधार खो चुकी है और उसके पास कोई वास्तविक चुनावी मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह केवल झूठे नैरेटिव गढ़ रही है। हल्द्वानी में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की रैली के बाद कथित ‘शुद्धिकरण’ के दावों को उन्होंने पूरी तरह से भ्रामक बताया।

धामी ने स्पष्ट किया कि पवित्र रामलीला मैदान में छोड़े गए भारी कचरे और वहां कथित तौर पर लगाए गए जिहादी नारों के कारण स्थानीय लोगों द्वारा केवल सफाई की गई थी, और इस सफाई अभियान में दलित समुदाय के लोग भी शामिल थे। अंकिता भंडारी मामले में उन्होंने बताया कि सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर 1,000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, तीनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है, और परिवार के अनुरोध पर मामले की जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई है।

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