
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में ग्रामीण पुलिस की कार्यप्रणाली और रात्रिकालीन गश्त पर एक बार फिर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। साढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में पुलिस की सुस्ती और लचर गश्त का पूरा फायदा उठाते हुए शातिर चोरों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है।
बेखौफ बदमाशों ने रविवार की देर रात दुस्साहस की सारी हदें पार करते हुए दो अलग-अलग गांवों में धावा बोला और बंद पड़े मकानों तथा दुकानों को अपना निशाना बनाकर जमकर लूटपाट की। लगातार हो रही इन वारदातों से स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सुरक्षा दावों की पूरी तरह से पोल खुल गई है।
चोरी की यह बड़ी वारदात भीतरगांव क्षेत्र के कीसाखेड़ा और उसके पड़ोसी गांव वीरानखेड़ा में अंजाम दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कीसाखेड़ा गांव में रिटायर्ड दरोगा चंद्रशेखर यादव और उनके भाई मुन्ना यादव का मकान है। यह दोनों परिवार वर्तमान में चकेरी के अहिरवां इलाके में निवास करते हैं और केवल खेती-किसानी की देखरेख के लिए कभी-कभार गांव आते हैं।
इसी सूनेपन का फायदा उठाकर रविवार रात चोरों ने उनके मकान के मुख्य द्वार का ताला बेहद सफाई से काट दिया। इसके बाद बदमाशों ने बड़े ही इत्मीनान से घर के अंदर प्रवेश किया और सभी कमरों के कुंडे तथा ताले चटका कर वहां मौजूद सारा कीमती सामान समेट लिया। इस पूरी घटना का खुलासा सोमवार की सुबह तब हुआ, जब स्थानीय पड़ोसियों ने मकान के टूटे हुए ताले देखे और घर के अंदर-बाहर आवारा कुत्तों को घूमते हुए पाया।
कीसाखेड़ा में हाथ साफ करने के बाद इन बेखौफ चोरों ने पास के ही वीरानखेड़ा गांव का भी रुख किया। वहां भी सुरक्षा व्यवस्था को धता बताते हुए बदमाशों ने एक परचून की दुकान और एक अन्य बंद पड़े मकान को अपना शिकार बनाया और वहां से सामान पार कर दिया। एक ही रात में ताबड़तोड़ हुई इन सिलसिलेवार चोरियों की घटनाओं ने पूरे ग्रामीण इलाके में भारी दहशत और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है।
ग्रामीणों का स्पष्ट रूप से आरोप है कि रात के समय पुलिस की गश्त पूरी तरह से नदारद रहती है, जिसके चलते अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि वे बिना किसी खौफ के वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। घटना की जानकारी मिलने के बाद अब स्थानीय लोगों में पुलिस के खिलाफ गहरा रोष व्याप्त है।




