उत्तर प्रदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त फैसला: मेजा में युवक की अवैध हिरासत पर 50 हजार का मुआवजा, दोषी पुलिसकर्मियों से होगी वसूली

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रयागराज के मेजा थाना क्षेत्र निवासी कमलेश कुमार को 15 अगस्त से 19 अगस्त 2026 तक पुलिस हिरासत में रखे जाने को पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया है। पुलिस की इस मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए अदालत ने राज्य सरकार को पीड़ित कमलेश को 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि मुआवजे की यह राशि विभागीय जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों से वसूली जाएगी।

यह पूरा मामला कमलेश के एक पड़ोसी द्वारा की गई शिकायत से जुड़ा है, जिसमें उन पर बांग्लादेशी नागरिक होने और फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रहने का आरोप लगाया गया था। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने कमलेश को 15 अगस्त को ही हिरासत में ले लिया था, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उनकी आधिकारिक गिरफ्तारी 19 अगस्त को दिखाई गई। इसके बाद उन्हें मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अपनी इस अवैध हिरासत को चुनौती देते हुए कमलेश ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका दायर की थी।

अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि उसका ध्यान कमलेश की नागरिकता से जुड़े आरोपों के गुण-दोष पर नहीं, बल्कि केवल उनकी कथित अवैध हिरासत तक सीमित है। पुलिस के दस्तावेजों से यह साबित हो गया कि कमलेश चार दिनों तक बिना किसी कानूनी आधार के हिरासत में थे।

अदालत ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का गंभीर हनन मानते हुए उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया, बशर्ते वह किसी अन्य मामले में वांछित न हों। इस लापरवाही के लिए संबंधित थाना प्रभारी (SHO) और विवेचक को पहले ही निलंबित किया जा चुका है और अब विभागीय जांच के जरिए उन पर जिम्मेदारी तय करते हुए हर्जाने की वसूली की जाएगी।

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