
उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में सोशल मीडिया पर एक भड़काऊ पोस्ट को लेकर हुए विवाद में एक व्यापारी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई है। इस खौफनाक वारदात के बाद सूबे की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
मामले में स्थानीय पुलिस की घोर लापरवाही सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद को आरोपियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर लखनऊ में धरने पर बैठना पड़ा। मंत्री के इस कड़े रुख के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया और त्वरित कार्रवाई करते हुए लापरवाही बरतने वाले तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
वारदात का खौफनाक घटनाक्रम
गोंडा के रेक्सड़िया मल्लाहन पुरवा के रहने वाले 45 वर्षीय विनोद कुमार साहनी शाहपुर बाजार में बर्तन का व्यापार करते थे। बुधवार की रात करीब आठ बजे जब वह अपनी दुकान बढ़ाकर मोटरसाइकिल से घर वापस लौट रहे थे, तभी यह जानलेवा हमला हुआ। दुकान से कुछ ही दूरी पर चार बाइकों पर सवार होकर आए करीब 10 हमलावरों ने विनोद का रास्ता रोक लिया और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद बदमाशों ने उन पर कांता और भाला जैसे धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ प्रहार किए। खून से लथपथ विनोद को अधमरा और मृत समझकर हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही बदहवास परिजन मौके पर पहुंचे और उन्हें स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए। वहां से उन्हें मेडिकल कॉलेज और फिर हालत बेहद गंभीर होने पर लखनऊ रेफर कर दिया गया। दुर्भाग्यवश, लखनऊ में इलाज के दौरान विनोद ने दम तोड़ दिया।
पुलिस की कार्रवाई और मंत्री का कड़ा रुख
इलाज के दौरान ही विनोद ने अदम्य साहस दिखाते हुए तीन हमलावरों की पहचान कर ली थी। विनोद की तहरीर के आधार पर पुलिस ने बुधवार देर रात 10 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले की प्राथमिकी दर्ज की थी, जिसे उनकी मृत्यु के बाद हत्या की धाराओं में तब्दील कर दिया गया। गोंडा के पुलिस अधीक्षक अभिषेक ने स्पष्ट किया कि इस निर्मम हत्या की मुख्य वजह सोशल मीडिया पर एक वर्ग विशेष के खिलाफ की गई भड़काऊ पोस्ट थी।
पोस्टमार्टम में हो रही देरी और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से आक्रोशित होकर निषाद पार्टी के प्रमुख और मत्स्य पालन मंत्री संजय निषाद लखनऊ स्थित पोस्टमार्टम हाउस के बाहर अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। सरकार के ही एक मंत्री के धरने पर बैठने से पुलिस महकमे में खलबली मच गई। इसके बाद पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए तीन नामजद आरोपियों शुभम सिंह उर्फ गोलू, सुभाष सिंह और अंतिम सिंह को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही, समय पर शिकायत न सुनने और भारी लापरवाही बरतने के आरोप में परसपुर थानाध्यक्ष कमल शंकर, शाहपुर चौकी प्रभारी अंकित सिंह और बीट सिपाही अभिमन्यु भारती को निलंबित कर दिया गया है। इन तीनों के खिलाफ विभागीय जांच के भी सख्त निर्देश दिए गए हैं।
विपक्ष का सरकार पर तीखा प्रहार
व्यापारी की सरेआम हत्या के बाद उत्तर प्रदेश का सियासी पारा पूरी तरह से चढ़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस हत्याकांड की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने तीखा आरोप लगाया कि सरकार ने अपने कुकर्मों को छिपाने के लिए पुलिस बल का दुरुपयोग किया है, जिससे न केवल पुलिस की शक्ति कम हुई है बल्कि झूठे मुकदमों और एनकाउंटर की आड़ में पूरी व्यवस्था भ्रष्ट हो गई है।
वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने राज्य की कानून-व्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त बताते हुए कहा कि सत्ता के संरक्षण में पल रहे गुंडे अब बेखौफ होकर आम जनता को अपना शिकार बना रहे हैं। पूर्व मंत्री और वरिष्ठ सपा नेता योगेश प्रताप सिंह ने भी इस सनसनीखेज घटना को प्रदेश की कानून-व्यवस्था को शर्मसार करने वाला कृत्य करार देते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।



