
मीरपुर में हुए भयानक विस्फोट ने कई परिवारों को जिंदगी भर न भूलने वाला घाव दिया है। इस हादसे ने किसी घर का चिराग बुझा दिया तो किसी आंगन की किलकारियां हमेशा के लिए शांत कर दीं। रेलवे में काम करने वाले विक्रम सरोज का खुशहाल परिवार भी इसी त्रासदी की भेंट चढ़ गया।
विक्रम अपनी पत्नी अंजू, बेटी संजना और दो बेटों अंश व शिवांश के साथ मीरपुर में रहते थे। सोमवार को हुए धमाके ने उनके पूरे परिवार को निगल लिया और अब इस घर की इकलौती वारिस के रूप में सिर्फ 12 साल की संजना ही बची है।
संजना के मन में उस खौफनाक दिन का मंजर अब भी ताजा है। घटना के वक्त उसके पिता मनौरी स्टेशन से ड्यूटी कर खाना खाने घर आए थे। संजना पिता से पैसे लेकर चॉकलेट खरीदने दुकान गई थी, तभी अचानक तेज धमाकों की आवाज गूंजने लगी। वह बुरी तरह घबरा गई और जान बचाने के लिए धान के खेत में जाकर छिप गई। कीचड़ में सनी संजना को उस वक्त इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि खेत में छिपने के दौरान उसने अपने माता-पिता और दोनों भाइयों को हमेशा के लिए खो दिया है।
इस विभीषिका ने मीरपुर निवासी गया प्रसाद साहू पर भी भयानक कहर बरपाया। प्रयागराज में मिठाई की दुकान पर काम करने वाले गया प्रसाद को रास्ते में ही धमाके की खबर मिली। जब वह बदहवास हालत में घर पहुंचे तो उनका मकान पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुका था। उनकी पत्नी अनीता अस्पताल में गंभीर हालत में भर्ती मिलीं, लेकिन उनकी बेटी जान्हवी और तीन बेटों आदित्य, रवि और अमित की जान जा चुकी थी। एक पल में ही गया प्रसाद की पूरी दुनिया उनके सामने उजड़ गई।
वहीं, इसी विस्फोट की चपेट में आकर शेष नारायण पांडेय का दो मंजिला घर भी भरभरा कर गिर गया। इस हादसे में वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए, हालांकि गनीमत यह रही कि घटना के समय उनके परिवार के अन्य सदस्य खेतों की तरफ गए हुए थे जिससे उनकी जान बच गई।
मीरपुर में हुए इस धमाके ने सिर्फ ईंट-पत्थरों को नहीं गिराया, बल्कि कई जिंदगियों में ऐसा सूनापन भर दिया है जिसे अब शायद ही कभी दूर किया जा सके।



