
उत्तराखंड सरकार हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी (यूएफटीए) में वन कर्मियों के लिए एक स्थायी स्मारक ‘वन शहीद स्मृति स्थल’ का निर्माण करेगी। यह स्मारक उन वन कर्मियों को सम्मानित करेगा जिन्होंने जंगलों और वन्यजीवों की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।
कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए कर्मियों का दस्तावेजीकरण
प्रस्तावित स्मारक में उन वन कर्मियों की तस्वीरें और प्रशस्ति पत्र प्रदर्शित किए जाएंगे जो ड्यूटी के दौरान शहीद हुए। इसमें शामिल होंगे:
- उत्तराखंड में सेवा करने वाले वन कर्मी
- वर्ष 2000 में उत्तराखंड बनने से पहले अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौरान इस क्षेत्र में काम करने वाले कर्मी
- यूएफटीए में प्रशिक्षित वे रेंजर जो बाद में अन्य राज्यों में सेवा करते हुए शहीद हुए
- स्थायी, अस्थायी, संविदा, थर्ड-पार्टी और दैनिक वेतन भोगी कर्मी जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपना जीवन खोया
50 से अधिक नाम शामिल होने की संभावना
यूएफटीए ने पूरे उत्तराखंड के वन प्रभागों से शहीद कर्मियों के रिकॉर्ड मांगे हैं। तराई पूर्व, केदारनाथ वन्यजीव और कालागढ़ टाइगर रिजर्व समेत कई प्रभागों ने 30 से अधिक कर्मियों के प्रशस्ति पत्र जमा कर दिए हैं। अंतिम सूची में 50 से अधिक नाम शामिल होने की उम्मीद है।
शहीदों के परिवारों द्वारा उद्घाटन
यूएफटीए निदेशक संजीव चतुर्वेदी ने कहा कि इस स्मारक का उद्देश्य उन वन कर्मियों को मान्यता और सम्मान देना है जिनके बलिदान अब तक विभागीय रिकॉर्ड तक ही सीमित रहे। स्मारक का उद्घाटन अक्टूबर के अंत में शहीद वन कर्मियों के परिवारों की उपस्थिति में होने की संभावना है। बाद में पहचाने गए अतिरिक्त कर्मियों के विवरण भी इसमें शामिल किए जाएंगे।
दशकों के बलिदानों का सम्मान
रिकॉर्ड में विभिन्न परिस्थितियों में जंगलों की रक्षा करते हुए शहीद हुए कर्मी शामिल हैं। इनमें मई 1992 का मामला भी है, जब तराई पश्चिम वन प्रभाग के सहायक वन संरक्षक राम अवतार और डिप्टी रेंजर पान सिंह आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। यह स्मारक भविष्य की पीढ़ियों के लिए स्थायी रिकॉर्ड के रूप में भी काम करेगा।
भाजपा उत्तराखंड इकाई ने स्वागत किया
भाजपा उत्तराखंड इकाई ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में वन कर्मियों के बलिदान को सम्मान देने वाला ‘ऐतिहासिक कदम’ बताया है।



