
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में “मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” के अंतर्गत चौपाल-2026 का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अब तक राज्य भर में 13 हजार से अधिक उद्यमियों को इस योजना के माध्यम से सहायता प्रदान की जा चुकी है। इसके अलावा 8 हजार से अधिक महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को उद्यमिता एवं आजीविका के अवसरों से जोड़ा गया है।
उद्घाटन सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि उत्तराखंड के सभी जिलों के स्वयं सहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों के विपणन को सुगम बनाने के लिए देहरादून के आईटी पार्क स्थित 13 गांव में एक राज्य स्तरीय मार्केटिंग सेंटर स्थापित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तराखंड के गांव न केवल राज्य के विकास में भागीदार बन रहे हैं, बल्कि अपनी क्षमता और मेहनत से आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। राज्य के उत्साही युवा और उद्यमशील महिलाओं में कुछ सार्थक करने की इच्छा और कौशल है, साथ ही उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों में देश और दुनिया के बाजारों तक पहुंचने की अपार संभावनाएं हैं। जरूरत है इस प्रतिभा को सही दिशा देने की। इसी दृष्टि से राज्य सरकार “मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना” को आगे बढ़ा रही है। योजना के माध्यम से सरकार चाहती है कि उत्तराखंड के युवा नौकरी चाहने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बनें। साथ ही किसानों और महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि योजना के जरिए ग्रामीण उद्यमियों को व्यवसाय शुरू करने और विस्तार करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, तकनीकी मार्गदर्शन तथा बाजार से जोड़ने में सहयोग दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक ओर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से राज्य की 5 लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं को 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है, तो दूसरी ओर 3 लाख से अधिक महिलाएं सफलतापूर्वक लाखपति दीदी बन चुकी हैं। उत्तराखंड की महिलाएं पहाड़ी मसालों, मंडुआ, झंगोरा, दालों, शहद, अचार-जैम से लेकर हस्तशिल्प, ऊनी उत्पादों और स्थानीय कला को सफल उद्यम में बदल रही हैं। सरकार गांवों में बने उत्पादों को देश के बड़े शहरों तक पहुंचाने का काम कर रही है। इसी दिशा में “हाउस ऑफ हिमालयाज” नामक अम्ब्रेला ब्रांड बनाया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश को वोकल फॉर लोकल, लोकल टू ग्लोबल और आत्मनिर्भर भारत के मंत्र दिए हैं। राज्य सरकार इन मंत्रों को साकार करने की दिशा में काम कर रही है। सरकार चाहती है कि जब कोई उत्तराखंड का उत्पाद खरीदे, तो उसमें पहाड़ों की मेहनत, संस्कृति, परंपरा और मिट्टी की खुशबू भी महसूस हो।
इसी उद्देश्य से राज्य भर में ग्रामीण हट्स, मार्केटिंग सेंटर, कलेक्शन सेंटर और कृषि सेवा केंद्रों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि किसानों और उद्यमियों को बेहतर बाजार और बेहतर कीमत मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने का एक बड़ा उद्देश्य पहाड़ों से पलायन रोकना भी है। सरकार चाहती है कि युवा रोजगार की तलाश में गांव छोड़ने को मजबूर न हों। क्योंकि जब गांव मजबूत होंगे, तभी उत्तराखंड मजबूत होगा। इसी दिशा में ग्रामोत्थान परियोजना (आरईएपी) के माध्यम से गांवों के अत्यंत गरीब परिवारों को आजीविका से जोड़ने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने का काम भी किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के सभी 13 जिलों में “मुख्यमंत्री उद्यमशाला चौपाल” आयोजित किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देना और उनका लाभ दिलाना है। इसी उद्देश्य से प्रचार वैन भी गांवों में भेजी जा रही हैं, ताकि योजना की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने लाखपति दीदियों और महिला उद्यमियों को सम्मानित किया। उन्होंने उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत तैयार पुस्तक और वार्षिक रिपोर्ट का भी विमोचन किया। इसके अलावा उन्होंने एकीकृत कृषि क्लस्टर बेसिक ट्रेनिंग एंड मॉड्यूल, शिशु एवं बाल आहार मॉड्यूल तथा महिलाओं एवं बच्चों में एनीमिया की रोकथाम व प्रबंधन संबंधी मॉड्यूल का शुभारंभ भी किया।



