
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के नागरिकों से आगामी ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में पूरे उत्साह के साथ भाग लेने का आह्वान किया है। इस वर्ष राज्य भर में पांच करोड़ घरों पर तिरंगा फहराने का एक विशाल ऐतिहासिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि देश के गौरवशाली इतिहास और राष्ट्रप्रेम की भावना को जन-जन तक पहुंचाने का एक बड़ा राष्ट्रीय आंदोलन है। पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2022 से लेकर 2025 तक झंडा फहराने वाले घरों की संख्या में लगातार भारी वृद्धि हुई है।
अब इस आंकड़े को पांच करोड़ के पार ले जाने के लिए स्वयं सहायता समूहों, एमएसएमई और खादी संस्थाओं को भी इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है। आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए राशन की दुकानों, पंचायत भवनों, डाकघरों, पेट्रोल पंपों और जन सेवा केंद्रों जैसी जगहों पर राष्ट्रीय ध्वज आसानी से उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्वतंत्रता दिवस के इस जश्न को और भी खास बनाने के लिए 14 और 15 अगस्त को राज्य के सभी सिनेमाघरों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का प्रसारण अनिवार्य कर दिया गया है। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में तिरंगा रैलियां, प्रदर्शनियां, संगीत समारोह और रंगोली जैसी अनेक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। वहीं प्रदेश के प्रमुख चौराहों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों को तिरंगा थीम से सजाया जाएगा।
स्कूलों और कॉलेजों में भी युवा पीढ़ी को आजादी के इतिहास से जोड़ने के लिए चित्र प्रदर्शनियों और वंदे मातरम गायन जैसे विशेष आयोजन किए जाएंगे। इसके अलावा 9 अगस्त को काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस से लेकर 15 अगस्त तक सभी शहीद स्मारकों और स्मृति स्थलों पर विशेष स्वच्छता, रंगाई-पुताई और सजावट अभियान चलाया जाएगा, जहां पुलिस बैंड की धुनों के बीच स्वतंत्रता सेनानियों और शहीदों के परिजनों को पूरे सम्मान के साथ सम्मानित किया जाएगा।
राष्ट्रीय पर्व के इस उल्लास के बीच 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ भी पूरी संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि देश के बंटवारे के दर्द को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए ताकि वे राष्ट्रीय एकता और अखंडता के महत्व को गहराई से समझ सकें।
इस अवसर पर हर जिला मुख्यालय में विशेष प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी और बंटवारे का दंश झेलने वाले सिंधी, पंजाबी, बंगाली और बांग्लादेश से आए शरणार्थी परिवारों को विशेष रूप से आमंत्रित कर उनके अनुभव सुने जाएंगे। साथ ही उनके साथ मिलकर कैंडल मार्च निकाला जाएगा और विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में परिचर्चाएं आयोजित कर युवाओं को इस ऐतिहासिक त्रासदी से अवगत कराया जाएगा।



