
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त 2025 को दो दिवसीय यात्रा पर टोक्यो पहुंचे, जो सात साल में उनकी पहली स्वतंत्र जापान यात्रा है। जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के निमंत्रण पर हो रही इस यात्रा का उद्देश्य भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को मजबूत करना, व्यापार, प्रौद्योगिकी, रक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है।

भारतीय राजदूत सिबी जॉर्ज ने बताया कि दोनों देशों के बीच चर्चा द्विपक्षीय मुद्दों से आगे बढ़कर क्वाड जैसे बहुपक्षीय मंचों और भू-राजनीतिक व आर्थिक परिदृश्य पर केंद्रित होगी, खासकर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 50% टैरिफ ने भारत-अमेरिका व्यापार को प्रभावित किया है।
मोदी और इशिबा अगले दशक में जापान से 68 अरब डॉलर के निवेश को अंतिम रूप देंगे, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और पर्यावरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देश अगली पीढ़ी के ई10 शिनकान्सेन बुलेट ट्रेनों को भारत में निर्मित करने के लिए समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके लिए 2030 तक तकनीक हस्तांतरण होगा।
टोक्यो इलेक्ट्रॉन और फ्यूजीफिल्म जैसी कंपनियां टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में भारतीय एसएमई को जोड़ रही हैं। भारत और जापान के बीच 2024-25 के पहले नौ महीनों में 21 अरब डॉलर का व्यापार हुआ, और जापान भारत में 43.2 अरब डॉलर के साथ पांचवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है।
मोदी 29 अगस्त को सुबह 10:30 से 11:10 बजे तक जापानी और भारतीय उद्योगपतियों के साथ व्यापारिक बैठक में हिस्सा लेंगे, जिसमें सोनी, हिताची और नोमुरा जैसी कंपनियां शामिल होंगी। दोपहर में वे शोरिनजान-दारुमा-जी बौद्ध मंदिर का दौरा करेंगे और 2:30 से 5:15 बजे तक 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में इशिबा के साथ चर्चा करेंगे। 30 अगस्त को दोनों नेता सेंडाई में सेमीकंडक्टर फैक्ट्री और शिनकान्सेन प्लांट का दौरा करेंगे।
रक्षा सहयोग में 2008 की संयुक्त घोषणा को अपग्रेड किया जाएगा, जिसमें सैन्य अभ्यास, तकनीक हस्तांतरण और जहाज रखरखाव पर सहमति होगी। क्वाड पर चर्चा इंडो-पैसिफिक में शांति और स्थिरता के लिए भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करेगी।
इस यात्रा के बाद मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के तियानजिन में SCO समिट में हिस्सा लेंगे, जहां वे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात करेंगे। भारत ने SCO में नवाचार, स्वास्थ्य और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में योगदान दिया है। मोदी ने कहा कि जापान और चीन की उनकी यात्राएं राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देंगी और क्षेत्रीय व वैश्विक शांति, सुरक्षा और सतत विकास में योगदान करेंगी।