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राहत : अब नहीं होगी नोटों की दिक्‍कत, पीएम मोदी ने उठाया बड़ा कदम

नई दिल्‍ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोट बंदी की घोषणा के बाद से लगातार विपक्ष की आलोचना को झोल रही सरकार अब और जोखिम नहीं उठाना चाहती है। इसे ध्‍यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने वरिष्‍ठ अधिकारियों की टीमों को नासिक (महाराष्‍ट्र) और देवास (मध्‍य प्रदेश) भेजा है।

मोदी की नोट बंदी

इन दोनों जगहों पर नए नोट छापे जा रहे हैं जिनकी व्‍यक्तिगत तौर पर निगरानी करने के लिए यह टीमें बनाई गई हैं। अधिकारी नए नोटों की प्रिंटिंग और वितरण की प्रक्रिया को और तेज करने की संभावना पर ध्‍यान देंगे।

छपाईखाने चौबीसों घंटे चल रहे हैं और स्‍टाफ को अतिरिक्‍त घंटों के लिए काम करने और अपनी छुट्टियां छोड़ने पर वित्‍तीय इंसेंटिव दिए जाने का वादा किया गया है। सरकार ने आरबीआई को मैसूर (कर्नाटक) और सलबोनी (पश्चिम बंगाल) की सुरक्षा प्रेसों में नए नोट छापने की प्रक्रिया को और तेज करने को कहा है।

नोट का 65 फीसदी हिस्‍सा आरबीआई की इकाइयों में छपता है, बाकी सरकारी छपाईखानों में छापे जाते हैं। वित्‍त मंत्रालय के वरिष्‍ठ अधिकारियों की टीम, विभिन्‍न एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है ताकि देश के विभिन्‍न हिस्‍सों में समय से नए नोट पहुंचाए जा सकें। सरकार ने भारतीय वायुसेना और कमर्शियल एयरलाइंस से भी संपर्क कर नोटों की ए‍यरलिफ्ट‍िंग कराई है।

फसल की बुवाई का मौसम आने के साथ ही सरकार का फोकस ग्रामीण इलाकों में नई नोट पहुंचाने पर है। 500 रुपए के नोट, जिसे नए डिजाइन के साथ पेश किया गया है और 100 रुपए के नोटों की किल्‍लत से उन्‍हें ज्‍यादा समस्‍या हो रही है जिन्‍हें 2,000 रुपए का नोट मिला है, अब फोकस इन नोटों की तरफ किया गया है।

एक सूत्र ने कहा, ”हमारे ध्‍यान में आया है कि 2000 रुपए के नोट रखने वालों को दिक्‍कत हो रही है क्‍योंकि छोटी मूल्‍य की नोटों की किल्‍लत होने से कारोबारी और दुकानदार बड़े नोट नहीं ले रहे हैं। हम अब छोटे मूल्‍य की नोटों पर ध्‍यान दे रहे हैं। साथ ही फसल बुवाई का मौसम शुरू हो गया है, हम ग्रामीण इलाकों में नोटों की सप्‍लाई सुनिश्चित कराने पर ज्‍यादा ध्‍यान देंगे।”

आरबीआई के वे छपाईखाने जहां अभी सिर्फ 2000 रुपए के नोट छापे जा रहे हैं, वहां दिसंबर की शुरुआत से 500 रुपए के नोट भी छपने शुरू हो जाएंगे। इसके लिए नई मशीनें लगाई जा रही हैं। आरबीआई को उच्‍च-सुरक्षा वाले कागज की पर्याप्‍त सप्‍लाई बरकरार रखने को कहा गया है जिसपर नोट छापे जाते हैं।

सप्‍लाई के साथ ‘कुछ समस्‍याएं’ हैं, सरकार दिसंबर अंत तक स्थिति ‘सामान्‍य के करीब’ पहुंचने की उम्‍मीद कर रही है। कुछ लॉजिस्टिक्‍स दिक्‍कतें थीं, जिनमें से ज्‍यादातर को दूर कर लिया गया है। इकॉनमी से बाहर किए गए नोटों के बराबर मूल्‍य वाले नोट प्रिंट करने में कई महीने लगेंगे, मगर सरकार के सख्‍त निर्देश हैं कि आम आदमी को और दिक्‍कत नहीं होनी चाहिए।

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