ये आयुर्वेदिक दवा करेगी Diabetes कंट्रोल

Diabetes-1459935870एजेन्सी/नियमित रूप से इस दवा को लेने पर मरीज का शुगर लेवल धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर आता है और लिवर व किडनी की कार्यक्षमता में भी सुधार होता है।

हाल ही लखनऊ स्थित एनबीआरआई (नेशनल बोटेनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट) और सीमैप (सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर मेडिसिनल एंड एरोमेटिक प्लांट्स) ने देश की पहली आयुर्वेदिक मधुमेह रोधी दवा बीजीआर-34 बनाई। यह  दवा डायबिटीज की शुरुआती अवस्था (स्टेज) से गुजर रहे लोगों को ध्यान में रखकर  बनाई गई है। विशेषज्ञों के अनुसार इस दवा का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता। 

दवा के लाभ

नियमित रूप से इस दवा को लेने पर मरीज का शुगर लेवल धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर आता है और लिवर व किडनी की कार्यक्षमता में भी सुधार होता है।

लेने का तरीका

टाइप-टू डायबिटीज से पीडि़त मरीजों के लिए यह दवा फायदेमंद है। इस दवा की एक-एक गोली दिन में दो बार भोजन से पहले लेनी होती है। जिसे लेने के उचित समय के बारे में डॉक्टर ही बताते हैं।

चरक संहिता बनी आधार

इस दवा को बनाने के लिए चरक संहिता को आधार बनाया गया। जिसमें छह जड़ी-बूटियां दारूहरिद्रा, विजयसार, गिलोय, मजीठ, मेठिका और गुड़मार का इस्तेमाल किया गया। दवा को बनाने में प्रयोग हुई जड़ी-बूटियों के अन्य फायदे इस प्रकार हैं।

दारूहरिद्रा: पेन्क्रियाज के काम को सुचारू बनाए रखती है।

विजयसार और गुड़मार : ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाकर कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करती हैं।

गिलोय: शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर किसी भी प्रकार के संक्रमण से बचाव करती है।

मजीठ: एंटीऑक्सीडेंट के रूप में काम करती है।

मेठिका: शरीर के अंगों की कार्यक्षमता में सुधार करती है।

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