महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने ‘डांस बार’ के संचालन में कड़ी शर्तें लगाने वाली ‘डांस बार विधेयक’ पर सोमवार को अपनी सहमति दे दी। मंत्रिमंडल से मुहर लगने के बाद इस विधेयक को अब राज्य के दोनों सदनों में पेश किया जाएगा।

उच्चतम न्यायालय ने एक महीने पहले कई शर्तों के साथ होटलों और रेस्तरां में डांस बार खोलने के लाइसेंस जारी करने का रास्ता साफ किया था।उच्चतम न्यायालय ने साथ ही डांस बार के अंदर सीसीटीवी लगाने और थानों में इसकी लाइव फुटेज दिखाने के राज्य सरकार के आदेश को खारिज कर दिया था। 

नए विधेयक में डांस बार के किसी रिहाइशी इमारत के अंदर न खोले जाने, स्कूल और धार्मिक स्थलों से कम से कम एक किलोमीटर की दूरी पर खोलने और बार रूम में शराब परोसे जाने पर मनाही आदि का प्रावधान है।

विधेयक में साथ ही डांस बार में अश्लीलता पर लगाम लगाने के भी कई तरीके अपनाने का प्रावधान है, जैसे बार बालाएं जिस तरह से थिरकती हैं, उससे अश्लीलता का बोध न हो और वे अधनंगी न रहें।

विधेयक के अनुसार डांस बार के गेट और डांस फ्लोर पर सीसीटीवी लगाना अनिवार्य होगा और सीसीटीवी के फुटेज को एक महीने तक संभाल कर रखना होगा। कोई भी बार बाला 21 साल से कम उम्र की नहीं होगी और उनका उत्पीडऩ करने पर 10 लाख का जुर्माना या तीन साल की सजा या फिर दोनों हो सकता है।

बार मालिकों को किसी भी बार बाला या कर्मचारी को काम पर रखने से पहले एक बॉन्ड करना होगा, जिसमें उसे दिए जाने वाले वेतन, भविष्य निधि आदि अन्य सुविधाओं का उल्लेख करना होगा। बार मालिकों को बार बालाओं तथा कर्मचारियों को पहचान पत्र देना होगा तथा उन्हें घर से लाने और छोडऩे के लिए कैब सेवा देनी होगी।

इससे पहले राज्य सरकार ने बार बालाओं पर पैसे लुटाने या फिर उन्हें छूने की कोशिश करने पर 50 हजार का जुर्माना या छह महीने की कैद का आदेश जारी किया था।