बिहार में आकर्षण का केंद्र बने ‘शराबबंदी’ के संदेश वाले पूजा पंडाल

बिहार में शराबबंदी पूर्णिया| बिहार में दुर्गा पूजा की तैयारी अंतिम चरण में हैं। ऐसे में जगह-जगह पंडालों को अंतिम रूप दिया जा रहा है तथा उसे आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है। हर बार की तरह इस बार भी पूजा समितियों ने लोगों को कई संदेश देते हुए पूजा पंडालों के निर्माण कराए हैं।इसमें सबसे आकर्षक पूर्णिया जिले के सराय में श्रीधाम पूजा समिति का पंडाल है। इस पंडाल का निर्माण बिहार में शराबबंदी कानून को आधार बनाकर किया गया है। इस पंडाल को देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं।

इस पंडाल के जरिए नीतीश सरकार की शराबबंदी के संदेश को लोगों तक पहुंचाने की कोशिश की गई है। पंडाल के मुख्य द्वार को शराब की विभिन्न ब्रांड की बोतलों के आकार में बनाया गया है, जिस पर ‘क्रॉस’ का निशान बनाकर एक खास संदेश भी दिया जा रहा है। पंडाल को ‘क्रॉस’ कर संदेश लिखा गया है कि ‘अब शराब नहीं, कभी नहीं’।

पूजा समिति के अध्यक्ष और पत्रकार राजेश कुमार नेकहा कि इस पंडाल की परिकल्पना समिति के सदस्य काशीनाथ ने पूर्णिया के पुलिस अधीक्षक निशांत कुमार तिवारी से प्रभावित होकर की थी।

उन्होंने बताया कि पुलिस अधीक्षक प्रत्येक दिन शहर और इसके आसपास के क्षेत्रों का घूम-घूमकर लोगों को शराबबंदी के संदेश देते रहे हैं। ऐसे में समिति के लोगों को लगा कि क्यों नहीं इस वर्ष पूजा पंडाल शराबबंदी की ‘थीम’ पर आधारित हो।

राजेश कहते हैं कि ऐसा नहीं कि यह कोई पहला मौका है जब ऐसा कोई आधार बनाकर पूजा पंडाल तैयार कराया गया है।

उन्होंने बताया, “सराय स्थित श्रीधाम सेवा समिति द्वारा वर्ष 1962 से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है और प्रत्येक वर्ष ज्वलंत मुद्दे को आधार बनाकर पूजा पंडाल बनवाया जाता है।”

उन्होंने बताया कि इसके पूर्व कारगिल युद्ध, मिसाइल मैन, रसोई गैस सब्सिडी छोड़ने के प्रधानमंत्री के अनुरोध को आधार बनाकर भी पूजा पंडाल तैयार करवाए गए थे।

समिति की उपाध्यक्ष पूनम बताती हैं कि लोगों को शराब छोड़ने के संदेश देने के लिए इस पंडाल का निर्माण करवाया गया है। वह कहती हैं, “आधुनिकता के साथ दुर्गा पूजा के पंडालों के स्वरूप भी बदल गए हैं। पारंपरिक पूजा पंडालों की जगह अब संदेश आधारित पंडालों ने ले ली है।”

समिति के सचिव राज कुमार सिंह कहते हैं कि इस पंडाल में कार्टूनों के जरिए ‘बेटी बचाओे-बेटी पढ़ाओ’, ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसे ज्वलंत मुद्दे भी प्रदर्शित किए गए हैं।

सिंह कहते हैं कि आने वाले श्रद्धालुओं की पहली नजर मुख्य द्वार पर ही पड़ती है। ऐसे में इस पंडाल को देखकर उन्हें भी एहसास होगा कि मां के दरबार में जाने से पहले वे भी संकल्प लें कि शराब को हाथ नहीं लगाएंगे।

इस पंडाल का निर्माण बंगाल के कारीगरों से कराया गया है।

उधर, पटना के बोरिंग रोड चौराहा स्थित बोरिंग रोड दुर्गा पूजा समिति द्वारा भी इस वर्ष शराबबंदी के संदेश को प्राथमिकता दी गई है। बोरिंग रोड दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष उमेश सिंह बताते हैं कि राजधानी में पहली बार पंडाल ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ की तरह बनाया गया है।

उन्होंने बताया कि इस बार जहां लोग भैंसा का पेट फाड़कर निकलते राक्षस को देख पाएंगे, वहीं कार्टून के जरिए शराबी को हथकड़ी लगाकर ले जाते हुए भी दिखाया जा रहा है।

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