प्रयागराज में हुआ “लू महोत्सव” का आयोजन ! ये है खास इलाहाबादी ठेठ अंदाज का महोत्सव …

रिपोर्ट – सईद रज़ा

प्रयागराज : आपने अब तक कई तरह के महोत्सव देखे और सुने होंगे | लेकिन आज हम आपको एक ऐसे महोत्सव से रुबरु कराने जा रहे हैं, जिस महोत्सव के बारे में शायद ही इससे पहले कभी आपने देखा और सुना होगा |

जी हां, हम आपको इलाहाबादी ठेठ अंदाज में मनाये जाने वाले “लू महोत्सव” से रुबरु करायें और आपको बतायेंगे कि लू को मात देने के लिए लू महोत्सव में किस तरह के खास इंतजाम किए गए हैं |

इन दिनों समूचे उत्तर भारत में प्रचंड गर्मी पड़ रही है, ऐसे में लोग गर्मी से बचने के लिए एसी और कूलर में बैठते हैं | लेकिन इलाहाबाद यानि प्रयागराज में लू महोत्सव का आयोजन हो रहा है |

इस लू महोत्सव के आयोजन को यहां की ठेठ जीवन शैली से जोड़कर देखा जा सकता है | इलाहाबादियों में ही ये जज्बा और उनकी ही ये आर्ट ऑफ लिविंग है कि वे इस तरह से आयोजन करते हैं |

इसमें सब लोग मिल-जुलकर लू को मात देने की कोशिश करते हैं | इसके लिए लू महोत्सव में जुटने वाले लोगों को माथे पर हिम चंदन का लेप लगाया जाता है और उनके शरीर पर विशेष खस इत्र लगाया जाता है |

 

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जिसके बाद गर्मी को काटने वाले मौसमी फल और ठंडई का दौर शुरु हो जाता है | इस महोत्सव में लू और गर्मी से बेपरवाह होकर लोग प्रकृति के दिए हुए ऐसे भोज्य पदार्थों का सेवन करते हैं जो वास्तव में गर्मी और लू से हमें बचाती है |

लू महोत्सव में सबसे खास होता है ठंडाई | इस ठंडई को तैयार करने के लिए इसमें तरबूज और खरबूज के बीज के साथ पोश्ते का दाना सिल बट्टे पर पीसकर मिलाया जाता है | इसमें दूध और मलाई, डाकर मिलाया जाता है |

इसके बाद केसर मिलाकर लोगों को इसे पिलाया जाता है | लोगों का मानना है कि लू से बचने के लिए इलाहाबाद में काफी पुराने समय से इस तरह की ठंडई तैयार करने की परम्परा हो रही है | जिसे आज लू महोत्सव में लोग पुर्नजीवित कर रहे हैं |

बहरहाल, इलाहाबाद को जानने और समझने वाले लोगों का मानना है कि लू महोत्सव तो बस एक बहाना है | ये इलाहाबादी ठेठ अंदाज लोगों को खाने-खिलाने और एक दूसरे से भेंट मुलाकात का बहाना है |

 

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