नियमों को पालन करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में पांच महीने बाद हुई सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट में मंगलवार को मुख्य पीठ समेत पांच पीठ ने शारीरिक दूरी के नियमों को पालन करते हुए सुनवाई शुरू कर दी। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा जारी किए गए रोस्टर के अनुसार सोमवार को मुख्य न्यायमूर्ति डीएन पटेल व न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ के अलावा न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने अदालत में सुनवाई की।

इसके अलावा न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव, न्यायमूर्ति योगेश खन्ना, न्यायमूर्ति जयंत नाथ की एकल पीठ ने अदालत में सुनवाई की। हर दिन पांच पीठ मामलों की सुनवाई करेंगी। वहीं अन्य पीठ वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई कर रही हैं।

हाई कोर्ट परिसर के अंदर अधिवक्ता व उनके मुवक्किल शारीरिक दूरी का पालन करते नजर आए। मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत अदालत के अंदर ही नहीं बाहर अधिवक्ताओं के बैठने वाले हॉल में भी शारीरिक दूरी का ख्याल रखते हुए बैठने का इंतजाम किया गया है, जिसका पालन किया जा रहा है। अधिवक्ता मास्क पहनने से लेकर सैनिटाइजेशन का विशेष ध्यान रख रहे हैं। कोरोना महामारी के कारण 24 मार्च के बाद से हाई कोर्ट की सभी अदालतें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई कर रही थी।

वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने अदालतों में सामान्य कामकाज के निलंबन की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ा दी है। एक सितंबर से 30 सितंबर के लिए सूचीबद्ध किए गए सभी मामलों को तीन नवंबर से सात दिसंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है। कॉज-लिस्ट में निर्धारित किए गए समय पर ही अधिवक्ता व वादी को कोर्ट परिसर के अंदर आने की अनुमति दी गई है। इस दौरान इंटर्न, विधि छात्र, वादी के रिश्तेदार और गैर-पंजीकृत क्लर्क को कोर्ट ब्लाक में प्रवेश नहीं गया। इतना ही नहीं 65 वर्ष से अधिक के अधिवक्ता, क्लर्क और वादी के भी कोर्ट ब्लाक आने पर प्रतिबंध है। कोर्ट रूम से लेकर हॉल तक में सेंट्रल एसी को ज्यादा तापमान पर चलाया जाएगा और अदालत कक्ष में पंखे का इंतजाम किया गया है। इसके अलावा, हर ब्लॉक में एक्जॉस्ट सिस्टम लगाया गया है, ताकि हवा को बाहर निकाला जा सके।

हाई कोर्ट में की गई है चिकित्सा सुविधा की व्यवस्था

हाई कोर्ट में कोविड-19 की आपात स्थिति होने पर अतिरिक्त एंबुलेंस से लेकर अन्य चिकित्सा सुविधा की भी व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही हाई कोर्ट में कोविड-19 के लिए समर्पित आइसोलेशन रूम भी है, ताकि कोरोना के लक्षण वाले व्यक्ति को अस्पताल में स्थानांतरित करने से पहले उसे वहां रखा जा सके। अस्पताल स्थानांतरित करने के बाद उक्त कमरे को सैनेटाइज किया जाएगा।

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