देशभर में मनाया जा रहा है रामनवमी का पर्व

images (20)एजेंसी/देशभर में आज भगवान श्री राम का स्मरण किया जा रहा है। दरअसल भगवान श्री राम के जन्मोत्सव की गूंज हर ओर सुनाई दे रही है। सुबह से ही श्रद्धालु पवित्र नदियों के किनारे पर पूजन और स्नान करने में लगे हैं। दोपहर करीब 12 बजे भगवान श्री राम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को स्वादिष्ट पंजेरी का प्रसाद और अन्य प्रसादी का लाभ भी मिलेगा। श्रद्धालु भगवान श्री राम के मंदिरों में श्रद्धा के साथ पूजन करने में लगे हैं। श्री राम सिया मंदिरों के ही साथ कृष्ण मंदिरों में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। श्रद्धालु श्रीराम, माता सीता, भगवान श्री लक्ष्मण और महाबलि श्री हनुमान का पूजन किया जा रहा है।

भगवान श्री राम जी को आकर्षक पौषाक धारण करवाई गई है। भगवान श्री राम के मंदिरों में सुंदरकांड, रामायण का पारायण किया जा रहा है।  कहीं राजा रामचंद्र की जय के जयकारे गूंज रहे हैं। तो कहीं भगवान श्री राम को पालने में झूलाने की तैयारी की जा रही है। भगवान श्री राम के जयकारों के ही साथ श्रद्धालु भक्तिभाव से भरे हुए हैं। भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या में श्री रामजन्मोत्सव का उल्लास छाया हुआ है। भगवान श्री राम के जन्म अवसर पर हर कहीं शंख, नागाड़े और घंटों की ध्वनि सुनाई दे रही है। 

क्यों मनाई जाती है श्री राम नवमी विक्रम संवत् के नववर्ष चैत्र प्रतिपदा से नौ दिन बाद अर्थात् नवमी तिथि को श्री राम नवमी का उत्सव मनाया जाता है। दरअसल इसके पूर्व के दिनों में नवरात्रि का पर्व होता है। नवमी तिथि पर दैवीय शक्ति का पूजन न करते हुए भगवान श्री राम का पूजन और स्मरण किया जाता है।

सारे जगत में आलोक छा गया

इस दिन अयोध्या के राजा दशरथ को भगवान श्री राम के रूम में पुत्र रत्न प्राप्त हुआ था। भगवान श्री राम का जन्म होते ही सारे जगत में आलोक छा गया था ऐसे में भगवान श्री राम का जन्मोत्सव इस अवसर पर मनाया जाता है। भगवान श्री राम विष्णु जी के अवतार थे। भगवान श्री राम ने राक्षस राज और अजेय माने जाने वाले रावण को युद्ध में परास्त कर उसका वध किया था।

भगवान श्री राम को इसलिए भी याद किया जाता है क्योंकि वे मर्यादा पुरूषोत्तम थे। भगवान श्री राम ने अपने पिता के दिए वचनों का पालन किया और 14 वर्षों तक वनवास का जीवन व्यतीत किया यही नहीं उन्होंने माता सीता का त्याग भी कर दिया था। भगवान श्री राम को जन्म देने वाली माता कौशल्या थी। उनका जन्म चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र के ही साथ कर्क लग्न में हुआ था। 

प्रकट हुए थे शंख – चक्र और विष्णु 

दरअसल चैत्र शुक्ल नवमी का बड़ा महत्व है। त्रेता युग में चैत्र शुक्ल नवमी तिथि पर रघुकुल शिरोमणि महाराज दशरथ और महारानी कौशल्या के यहां अखिल ब्राह्मण नायक अखिलेश ने जन्म लिया था। भगवान श्री राम का जन्म दोपहर 12 बजे हुआ था। भगवान के जन्म के पहले माता कौशल्या को शंख, चक्र, गदा, पद्म धारण किए हुए भगवान श्री हरि विष्णु दिखाई दिए। भगवान श्री राम के जन्म को लेकर ऋषि, किन्नर, चारण सभी खुश हो उठे। 

ऐसे करें पूजन – 
इस बार श्री राम नवमी बेहद ही दुर्लभ संयोग लेकर आई है। दरअसल आज मनाई जा रही श्री रामनवमी तिथि पर पुष्य नक्षत्र के ही साथ बुधादित्य योग का संयोग भी बन रहा है। भगवान श्री रामनवमी पर उच्च का सूर्य, बुध के साथ मिलकर बुधादित्य योग निर्मित कर रहा है। 

यह एक विशेष मुहूर्त है। यह एक अबूझ मुहूर्त और पुष्य नक्षत्र भी है। यह एक बहुत ही दुर्लभ योग है। भगवान श्री रामनवमी के दिन भगवान श्री राम का विशेष पूजन किया जा रहा है। नारद पुराण के अनुसार भगवान श्री राम की आराधना के लिए श्रद्धालुओं को उपवास करना होगा।

श्री राम का पूजन करना होगा। इसके बद ब्राह्मणों को भोजन करवाना होगा। इसी के साथ गौ, भूमि, वस्त्र आदि का दान करना होगा। यदि ऐसा किया जाता है तो जीवन में बहुत पुण्य मिलता है। भगवान राम का स्मरण उपवास कर और उपवास न कर भी किया जा सकता है।

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