कोरोना काल ने आइसक्रीम का कारोबार किया चौपट, इंडस्ट्री का हुआ हजारों करोड़ का नुकसान…

कोविड महामारी ने इस साल आइसक्रीम के कारोबार को चौपट कर दिया. इससे उद्योग को हज़ारों करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है. यह नुकसान संगठित क्षेत्र में 15,000 करोड़ रुपये और असंगठित क्षेत्र में 30,000 करोड़ रुपये से अधिक का है.

आइसक्रीम का पीक सीजन आमतौर पर फरवरी से जून तक होता है. यानी गर्मियों की शुरुआत से लेकर मानसून की दस्तक तक. महामारी के चलते लॉकडाउन की वजह से इस सीजन में आइसक्रीम की नगण्य बिक्री हुई है. आमतौर पर साल के गर्मियों के चार महीने में ही पूरे साल की आइसक्रीम बिक्री का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आता है.

आइसक्रीम उद्योग पर प्रवासी मजदूरों के पलायन का भी बुरा असर पड़ा है. अधिकतर आइसक्रीम के ठेलों (पुशकार्ट्स) को यही मजदूर चलाते हैं.

इंडियन आइसक्रीम मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रवक्ता अनुव्रत पबराई ने आजतक/इंडिया टुडे से कहा, “जब से मैं आइसक्रीम उद्योग में आया हूं, ये सबसे बुरा दौर देख रहा हूं. मार्च से जुलाई के अंत तक चलने वाला सीजन पूरी तरह बर्बाद हो गया है. प्रवासी मजदूरों के चले जाने से पुशकार्ट चलाने वाले बहुत कम बचे हैं. हम चाहते हैं कि प्रवासी मजदूर जल्द से जल्द लौटें. मैटीरियल की कमी से भी उद्योग ऑपरेट नहीं कर पा रहा है.”

वर्तमान में पूरा आइसक्रीम उद्योग दो क्षेत्रों में विभाजित है: संगठित और असंगठित.

पबराई ने आगे बताया, “इंडियन आइसक्रीम मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन लगभग 80 सदस्यों के साथ भारतीय आइसक्रीम निर्माताओं का टॉप संघ है, सभी बड़े आइसक्रीम ब्रैंड निर्माता जैसे क्वॉलिटी वॉल, क्रीम बेल, वाडीलाल, अरुण और नेचुरल्स, मामा मिया जैसी कंपनियां एसोसिएशन की सदस्य हैं. संगठित क्षेत्र जो एसोसिएशन का प्रतिनिधित्व करते हैं, उनका कारोबार लगभग 15-17 हजार करोड़ रुपये का है. हमने राजस्व के मामले में पहले ही लगभग 5-6 हजार करोड़ खो दिए हैं.”

अम्फान ने पहुंचाई और चोट

पूर्वी भारत में चक्रवात अम्फान ने मई में आइसक्रीम उद्योग को और चोट पहुंचाई. बिजली की आपूर्ति में बाधा से लेकर कोल्ड स्टोरेज तक पहुंच नहीं होने से दिक्कतें और बढ़ गईं. दुकानों में आइसक्रीम को पिघलने से बचाने के लिए बिजली की हर वक्त आपूर्ति जरूरी होती है.

पबराई कहते हैं, “’मार्च में जब लॉकडाउन हुआ, फिर जून तक दुकानें धीरे-धीरे खुलने लगीं लेकिन मुंबई, अहमदाबाद, दिल्ली, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अभी भी स्थिति खराब है, जो उद्योग के लिए निराशाजनक है. हालांकि अब लोगों का बाहर निकलना धीरे धीरे बढ़ रहा है लेकिन रात 9 बजे के बाद सब बंद हो जाता है. आम तौर पर लोग आइसक्रीम खाने के लिए दिन में लेट घर से निकलना पसंद करते हैं. 9 बजे की डेडलाइन से रेस्तरां भी नुकसान भुगत रहे हैं. अगर शहरों में रात 11-12 बजे तक खुलने की अनुमति मिलती है तो उद्योग की स्थिति में थोड़ा सुधार आ सकता है.”

क्या कहते हैं आइसक्रीम के शौकीन

आइसक्रीम के शौकीनों ने भी अपने अनुभव आजतक/इंडिया टुडे से साझा किए. एक प्रमुख रेस्तरां चेन के मालिक शिलादित्य चौधरी ने कहा, “हम इस लॉकडाउन के खुलने का इंतजार कर रहे थे और आइसक्रीम के लिए पबराई हमेशा से हमारे पसंदीदा रहे हैं. शायद जब से वो दोबारा खुले हैं, मैं 5वीं बार यहां आया हूं. अभी एक हफ्ता हुआ है. और मैं करीब करीब हर दिन यहां आया हूं.”

सिद्धि अग्रवाल ने कहा, “हमने आईसक्रीम को बहुत मिस किया. 3 महीने हो गए, हम कोरोना के कारण आइसक्रीम से परहेज करते रहे. जब हम घर से बाहर निकले तो ये आइसक्रीम पार्लर खुला दिखा, इसलिए आइसक्रीम खाने आ गए. ये काफी लंबा रहा, लेकिन अब भी सोशल डिस्टेंसिंग और हाइजीन का ध्यान रखना जरूरी है. ज्यादा आइसक्रीम खाने से बचना चाहिए लेकिन कभी-कभार खाने में दिक्कत नहीं.’’

आइसक्रीम पसंद करने वाली कंचन अग्रवाल ने कहा, “जब लॉकडाउन शुरू हुआ, तो जीवन पर शाब्दिक रूप से विराम लगा, लेकिन अब हम आइसक्रीम खाने से खुद को रोक नहीं सके. फिर भी हमने 3 महीने बाद आइसक्रीम का स्वाद चखा. हां, लेकिन हमें बहुत सावधान रहने की जरूरत है. हाथों को सैनेटाइज करते रहना आवश्यक है.’’

आइसक्रीम के शौकीन अभिषेक दास ने कहा, “लॉकडाउन के कारण हमारे घर के पास आइसक्रीम उपलब्ध नहीं थी, लेकिन यहां मिलने वाली आइसक्रीम वास्तव में अद्भुत है. बस इसे खाने के लिए पहले मैं हफ्ते में कम से कम दो बार, अपने परिवार के साथ 10-12 किलोमीटर दूर से यहां आता था. लेकिन कोरोना की वजह से परिवार के साथ आना सुरक्षित नहीं है. इसलिए सिर्फ मैं आया हूं और यहां से आइसक्रीम घर ले जाऊंगा.”

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