Sunday , April 23 2017

केजरीवाल को बड़ा झटका, अब नहीं बोलेंगे बड़े बोल

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को झटका देते हुए उनके खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले को स्थगित करने की याचिका खारिज कर दी। केजरीवाल पर आपराधिक मानहानि का मामला केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने दायर किया है। इससे पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि केजरीवाल ने अपनी याचिका में शीर्ष अदालत से अपने खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले को रद्द करने की मांग की थी।

केजरीवाल को झटका

केजरीवाल ने अपनी याचिका में कहा कि जेटली ने दिल्ली उच्च न्यायालय में भी एक मुकदमा दायर किया है। इसलिए आपराधिक कार्यवाही को रोक दिया जाना चाहिए।

याचिका खारिज करते हुए न्यायमूर्ति पिनाकी चंद्र घोष और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी से कहा कि ऐसा कोई कानून बताइए जिसमें यह प्रावधान हो कि आपराधिक और दीवानी मामले एक साथ नहीं चल सकते।

केजरीवाल की याचिका में तर्क दिया गया था कि उच्च न्यायालय के समक्ष दीवानी मामले की सुनवाई के परिणाम का अधीनस्थ अदालत में चल रहे आपराधिक मानहानि के मामले पर असर होगा। पीठ ने पूछा कि क्या साक्ष्य अधिनियम में यह प्रावधान है कि दीवानी मामले में उच्च न्यायालय का फैसला आपराधिक मानहानि के मामले पर बाध्यकारी होगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री की अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद केजरीवाल के वकील जेठमलानी ने अदालत से कहा कि अदालत को एक राज्य के कमजोर मुख्यमंत्री की रक्षा करनी चाहिए।

जेठमलानी की इस बात पर खंडपीठ ने कहा, “हम यहां मामले के रिकॉर्ड के अनुसार फैसले लेने के लिए हैं।”

केजरीवाल ने शीर्ष अदालत में दिल्ली उच्च न्यायालय के 19 अक्टूबर के आदेश को चुनौती दी थी, जिसने उनकी आपराधिक मानहानि के मामले को स्थगित करने की याचिका को ठुकरा दिया था।

मजिस्ट्रेट अदालत ने 19 मई को केजरीवाल की इस दलील को खारिज कर दिया था कि दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दीवानी वाद के मामले के लंबित रहने के दौरान आपराधिक मानहानि मामले में कार्यवाही को स्थगित रखा जाए।

आपराधिक मानहानि और दीवानी मानहानि का मामला जेटली ने केजरीवाल के खिलाफ दायर किया है। केजरीवाल ने आरोप लगाया था कि जेटली ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) में शीर्ष पद रहते हुए कई गड़बड़ियां की थीं।

जेटली ने केजरीवाल और अन्य पांच आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं के खिलाफ एक दीवानी मानहानि का मामला दायर किया था। उन्होंने आप नेताओं के वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप के बाद नुकसान के तौर पर दस करोड़ रुपये की मांग की है।

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