आल्हा ओर उदल आज भी प्रतिदिन आते है यहाँ दर्शन करने

0ea9a124491fc33539f6014de94d7b90_570fd26f3fa0fएजेंसी/जी हाँ आल्हा और उदल के बारे में किसने नहीं सुना होगा ये वही शुरवीर है जिन्होंने प्रथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया था। पर क्या आप जानते है कि ये दोनों भाई आज भी माँ शारदा के दर्शन के लिए माई के मंदिर में आते है।

हम बात कर रहे है सतना जिले की मैहर तहसील के पास त्रिकूट पर्वत पर बने मैहर देवी के मंदिर की यहाँ कि यह मान्यता है इस मंदिर में यदि कोई रात रुकता है तो वह सुबह मृत पाया जाता है जिसके पीछे श्रधालुओ का कहना है कि आल्हा और उदल रोज रात में माता के दर्शन के लिए आते है तथा माता का श्रृंगार भी करते है। यहाँ कोई रात रुकने कि जिद भी करता है तो रात में ही उसकी म्रत्यु हो जाती है।

साथ ही यहाँ कि यह भी मान्यता है कि इस घने पर्वत पर माता के मंदिर कि खोज सबसे पहले आल्हा ने ही की थी। 
इसके बाद आल्हा ने इस मंदिर में 12 सालों तक तपस्या कर देवी को प्रसन्न किया था। माता ने उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद दिया था। आल्हा माता को शारदा माई कह कर पुकारा करता था। तभी से ये मंदिर भी माता शारदा माई के नाम से प्रसिद्ध हो गया। आज भी यही मान्यता है कि माता शारदा के दर्शन हर दिन सबसे पहले आल्हा और उदल ही करते हैं। मंदिर के पीछे पहाड़ों के नीचे एक तालाब है,जिसे आल्हा तालाब कहा जाता है। यही नहीं, तालाब से 2 किलोमीटर और आगे जाने पर एक अखाड़ा मिलता है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहां आल्हा और उदल कुश्ती लड़ा करते थे।

पूरे भारत में सतना का मैहर मंदिर माता शारदा का अकेला मंदिर है। इसी पर्वत की चोटी पर माता के साथ ही काल भैरवी, भगवान हनुमान, देवी काली, देवी दुर्गा, गौरी-शंकर, शेष नाग, फूलमती माता, ब्रह्म देव और जलापा देवी की भी पूजा की जाती है।

यदि हम इसके पुरे पते कि बात करे तो हम आपको बता दे कि सतना जिले की मैहर तहसील के पास त्रिकूट पर्वत पर यह मंदिर बना है जहाँ मैहर नगरी से 5 किलोमीटर दूर पर्वत की चोटी के मध्य में ही शारदा माता का मंदिर है।

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