
उत्तर प्रदेश विधान परिषद (एमएलसी) की 11 महत्वपूर्ण सीटों पर हुए चुनाव के बाद आज से मतगणना की प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर आरंभ हो गई है। राज्य की पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन सीटों के परिणाम तय करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के चाक-चौबंद प्रबंध किए गए हैं।
पारदर्शी और शांतिपूर्ण मतगणना सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश के सात प्रमुख जिलों— लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, झांसी, बरेली और गोरखपुर में विशेष मतगणना केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर संबंधित निर्वाचन अधिकारियों की कड़ी निगरानी में मतपत्रों की छंटाई और गिनती का कार्य निर्बाध रूप से चल रहा है।
राजधानी लखनऊ में इस अहम प्रक्रिया के लिए स्मृति उपवन के निकट स्थित विशाल रमाबाई रैली स्थल को मुख्य मतगणना केंद्र के रूप में चुना गया है। प्रशासनिक सुविधा और व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए स्नातक और शिक्षक सीटों की मतगणना अलग-अलग स्थानों पर की जा रही है।
स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के मतों की गिनती हॉल नंबर सात में हो रही है, जबकि शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के वोटों की गिनती हॉल नंबर आठ में संपन्न कराई जा रही है। पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, जहां भारी पुलिस बल की तैनाती के साथ-साथ चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों से पैनी नजर रखी जा रही है। सुरक्षा और निष्पक्षता के मद्देनजर केवल अधिकृत चुनाव एजेंटों और ड्यूटी पर तैनात सरकारी अधिकारियों को ही मतगणना स्थल के भीतर प्रवेश की अनुमति दी गई है।
विधान परिषद के इन चुनावों को राज्य की राजनीति में बेहद अहम माना जा रहा है, यही कारण है कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) सहित तमाम राजनीतिक विश्लेषकों की निगाहें इसके नतीजों पर टिकी हुई हैं। चूंकि मतदान की पूरी प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के बजाय पारंपरिक बैलेट पेपर (मतपत्र) के माध्यम से संपन्न हुई है, इसलिए मतों की गिनती में सामान्य से अधिक समय लग रहा है।
प्राथमिक और द्वितीय वरीयता के वोटों की जटिल गणना के कारण यह अनुमान लगाया जा रहा है कि अंतिम और स्पष्ट परिणाम देर शाम या देर रात तक ही सामने आ सकेंगे। चुनाव आयोग और स्थानीय जिला प्रशासन मतगणना को पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए अपने सभी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करा रहे हैं।



