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यूजीसी ने जारी किए नए इक्विटी रेगुलेशन्स 2026: जाति-आधारित भेदभाव पर सख्ती, लेकिन विवाद बढ़ा

यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) ने ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एड्यूकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशन्स, 2026’ जारी किए हैं, जो उच्च शिक्षा संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए सख्त नियम लाते हैं। ये नियम 2012 के पुराने दिशानिर्देशों को अपडेट करते हैं और अब कानूनी रूप से बाध्यकारी हैं।

मुख्य प्रावधान:

  • भेदभाव की परिभाषा विस्तारित: जाति, जनजाति, धर्म, लिंग, विकलांगता, नस्ल या जन्म स्थान पर आधारित अनुचित व्यवहार (प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष) शामिल।
  • हर संस्थान में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) अनिवार्य: शिकायतें दर्ज करना, निगरानी और समावेशी प्रथाएं बढ़ावा देना।
  • इक्विटी कमेटी गठन: SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य। शिकायत पर 24 घंटे में बैठक, 15 दिनों में रिपोर्ट।
  • संस्थान प्रमुखों (VC/प्रिंसिपल) पर जिम्मेदारी: अनुपालन सुनिश्चित करना और UGC को रिपोर्ट देना।
  • गैर-अनुपालन पर सजा: UGC योजनाओं से बाहर, कार्यक्रम मंजूरी रद्द, मान्यता वापस।

UGC का कहना है कि हाल के वर्षों में जाति-आधारित शिकायतें 118% बढ़ी हैं (2019-24 में 1,160+ केस), और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों (रोहित वेमुला, पायल तड़वी केस) के बाद ये नियम जरूरी हैं। OBC को अब स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है, जो ड्राफ्ट में नहीं था।

विवाद क्यों?

  • आलोचकों (खासकर जनरल कैटेगरी छात्रों) का आरोप: नियम एकतरफा हैं, जनरल कैटेगरी को सुरक्षा नहीं, झूठी शिकायतों का खतरा, मेरिट प्रभावित हो सकता है।
  • कुछ का कहना: परिभाषाएं अस्पष्ट, दुरुपयोग संभव, कैंपस में सामाजिक विभाजन बढ़ सकता है।
  • सोशल मीडिया पर #ShameonUGC ट्रेंड, विरोध प्रदर्शन, इस्तीफे और PIL की खबरें।

समर्थक मानते हैं कि ये नियम लंबे समय से चली आ रही भेदभाव की समस्या को मजबूती से संबोधित करेंगे। नियम तुरंत लागू, सभी UGC-मान्यता प्राप्त संस्थानों पर बाध्यकारी।

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