
उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां पुलिस की वर्दी की आड़ में अपराध का एक बड़ा नेटवर्क चलाया जा रहा था। हरदी थाना क्षेत्र में दो बर्खास्त और पूर्व पुलिसकर्मियों ने खाकी वर्दी का खौफ दिखाकर आम दुकानदारों से अवैध वसूली का धंधा शुरू कर दिया था।
ये आरोपी स्थानीय व्यापारियों को गांजे की तस्करी के झूठे मुकदमों में फंसाने और फर्जी पुलिस एनकाउंटर में मार गिराने की खौफनाक धमकियां देकर मोटी रकम ऐंठने का प्रयास कर रहे थे। इस गंभीर मामले का पर्दाफाश करते हुए स्थानीय पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिससे खाकी को शर्मसार करने वाले इस पूरे सिंडिकेट की पोल खुल गई है।
इस पूरी कार्रवाई की शुरुआत शुक्रवार को एक गुप्त सूचना के आधार पर हुई। पुलिस को मुखबिर से खबर मिली थी कि लाल-नीली बत्ती लगी एक संदिग्ध कार, जिस पर सरकारी नंबर लिखा हुआ है, राजी चौराहे से दो लोगों का जबरन अपहरण करके उन्हें महसी की तरफ ले जा रही है।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल घेराबंदी की और सिंगिया नसीरपुर गांव के पास सिकंदरपुर जाने वाले बंधे पर इस संदिग्ध वाहन को रोक लिया। जब पुलिस ने चेकिंग की, तो ड्राइविंग सीट पर बैठा व्यक्ति पुलिस उपनिरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) की पूरी वर्दी में था। हालांकि, जब उससे विभागीय आईकार्ड और गाड़ी के कागजात मांगे गए, तो वह घबरा गया और कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका। बारीकी से जांच करने पर पता चला कि गाड़ी पर लगी नंबर प्लेट भी पूरी तरह से फर्जी थी।
गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे दो अन्य लोगों ने पूछताछ में हैरान करने वाले खुलासे किए। उन्होंने बताया कि वर्दी पहने इन बदमाशों ने उन्हें राजी चौराहे से हथियारों के बल पर उठाया था। उन्हें डराया गया था कि अगर उन्होंने मुंहमांगी रकम नहीं दी, तो उन्हें गांजा रखने के आरोप में जेल भेज दिया जाएगा या फिर उनका एनकाउंटर कर दिया जाएगा। जब पुलिस ने फर्जी दरोगा बने व्यक्ति से सख्ती से पूछताछ की, तो उसकी पहचान समर बहादुर सिंह के रूप में हुई।
समर बहादुर साल 1997 में पीएसी लखनऊ की 32वीं वाहिनी में भर्ती हुआ था, लेकिन उसके लगातार खराब आचरण और अनुशासनहीनता के चलते साल 2019 में उसे जबरन रिटायर कर दिया गया था। उसका दूसरा साथी श्रीप्रकाश द्विवेदी उर्फ प्रकाश दूबे भी साल 2006 बैच का सिपाही था, जिसे पुलिस विभाग से बर्खास्त किया जा चुका था। इन दोनों ने जेल में रहने के दौरान ही स्थानीय दुकानदारों के बारे में जानकारियां जुटाई थीं और बाहर आकर पुलिस की फर्जी पहचान के साथ धन उगाही का यह शातिर प्लान बनाया था।
इस घटना में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब अपहरण के शिकार हुए दोनों व्यक्तियों, मूले अवस्थी और वीरेंद्र, की सच्चाई सामने आई। पुलिस की कड़ी पूछताछ में इन दोनों ने स्वीकार किया कि वे वास्तव में अपनी पान और परचून की दुकानों से गांजे की पुड़िया बनाकर बेचने का अवैध काम करते थे। पूर्व पुलिसकर्मियों को इसी बात की भनक लग गई थी और वे इसी का फायदा उठाकर उनसे वसूली करना चाहते थे।
इन दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने जब सघन तलाशी अभियान चलाया, तो उनके पास से और गाड़ी के भीतर से कुल मिलाकर लगभग 7.795 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने इस पूरी कार्रवाई के दौरान एक तमंचा, कारतूस, दरोगा की वर्दी, पुलिस बैज, फर्जी नंबर प्लेट, नकदी, छह मोबाइल फोन और लाल-नीली बत्ती लगी कार जब्त कर ली है।
पकड़े गए पूर्व पुलिसकर्मियों का पुराना आपराधिक इतिहास भी रहा है, जिनमें अपहरण, डकैती और आर्म्स एक्ट जैसे गंभीर मामले शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया है।



