कांग्रेस ने पीएम मोदी से पूछा- क्या मानसून सत्र में देश की सुरक्षा और विदेश नीति पर होगी चर्चा? क्या होगी चर्चा?
कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल उठाया कि क्या सरकार संसद के आगामी मानसून सत्र में पहलगाम हमले के बाद देश की सुरक्षा और विदेश नीति की चुनौतियों पर पूर्ण बहस कराएगी।

यह सवाल तब आया जब पीएम मोदी ने 10 जून को सात सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्यों से मुलाकात की, जो पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिन्दूर के बाद आतंकवाद के खिलाफ भारत का संदेश देने 32 देशों की यात्रा पर गए थे। कांग्रेस ने यह भी पूछा कि क्या पीएम सभी राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक बुलाकर चीन और पाकिस्तान के खिलाफ भविष्य की रणनीति पर उन्हें विश्वास में लेंगे।
कांग्रेस के प्रमुख सवाल
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कई बिंदुओं पर सवाल उठाए:
- सर्वदलीय बैठक: क्या पीएम अब सभी दलों के नेताओं की बैठक बुलाएंगे और चीन-पाकिस्तान के खिलाफ भारत की रणनीति तथा सिंगापुर में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान के खुलासों (पाकिस्तान में गहरी सैन्य कार्रवाई और भारतीय विमानों के नुकसान की बात) पर विश्वास में लेंगे?
- मानसून सत्र में बहस: क्या सरकार मानसून सत्र (जुलाई 2025 से शुरू होने की संभावना) में पहलगाम हमले, ऑपरेशन सिन्दूर, और विदेश नीति पर खुली चर्चा के लिए तैयार है, खासकर जब इंडिया गठबंधन की विशेष सत्र की मांग ठुकराई जा चुकी है?
- आतंकियों पर कार्रवाई: क्या सरकार पहलगाम हमले के आतंकियों, जो कथित तौर पर पुंछ (दिसंबर 2023), गगनगीर, और गुलमर्ग (2024) के हमलों में भी शामिल थे, को न्याय के कटघरे में लाने के लिए प्रयास दोगुना करेगी?
- कारगिल जैसी समीक्षा समिति: क्या सरकार ऑपरेशन सिन्दूर का विश्लेषण करने के लिए कारगिल समीक्षा समिति (1999, के. सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता) जैसा विशेषज्ञ समूह बनाएगी, जो भविष्य के युद्ध, उभरते सैन्य प्लेटफार्मों, और संकट में सामरिक संचार पर सिफारिशें दे? क्या इसकी रिपोर्ट, संशोधनों के बाद, संसद में पेश की जाएगी, जैसा कि कारगिल समिति की रिपोर्ट फरवरी 2000 में किया गया था?
पृष्ठभूमि और संदर्भ
- पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिन्दूर: पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने देश को झकझोरा, जिसके बाद ऑपरेशन सिन्दूर के तहत भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की। सीडीएस जनरल चौहान ने सिंगापुर में खुलासा किया कि भारत ने पाकिस्तानी क्षेत्र में गहरी कार्रवाई की, हालांकि इसमें विमानों का नुकसान भी हुआ।
- सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल: सरकार ने हमले के बाद राष्ट्रीय एकता का संदेश देने के लिए सात प्रतिनिधिमंडल 32 देशों में भेजे, जिनमें कांग्रेस सांसद शशि थरूर, AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी, और पूर्व मंत्री गुलाम नबी आजाद जैसे नेता शामिल थे। पीएम मोदी ने 10 जून को इनसे मुलाकात की।
- विशेष सत्र की मांग: कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने अप्रैल 2025 से ही पहलगाम हमले पर विशेष संसद सत्र की मांग की थी, जिसे सरकार ने ठुकरा दिया। 3 जून को 16 दलों ने पीएम को पत्र लिखकर फिर यह मांग दोहराई।
सरकार का रुख
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार मानसून सत्र (21 जुलाई 2025 से शुरू होने की संभावना) में सभी मुद्दों, जिसमें ऑपरेशन सिन्दूर शामिल है, पर चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, विशेष सत्र की मांग को खारिज करते हुए सरकार ने इसे “ध्यान भटकाने” का प्रयास करार दिया। बीजेपी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह पहलगाम हमले पर राजनीति कर रही है और “पाकिस्तान के साथ खड़े होने” जैसे संदेश दे रही है।
विपक्ष का दबाव
जयराम रमेश ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि पीएम विशेष सत्र से “भाग सकते हैं, लेकिन मानसून सत्र से नहीं।” विपक्ष का कहना है कि सरकार ने विदेशी देशों और मीडिया को पहलगाम हमले की जानकारी दी, लेकिन संसद और जनता को अंधेरे में रखा। कांग्रेस ने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार पारदर्शिता बरतेगी और ऑपरेशन सिन्दूर की तरह भविष्य की रणनीतियों पर संसद को भरोसे में लेगी।