सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: अमीर आरोपी PMLA को चुनौती देकर ट्रायल से बचने की कोशिश न करें
सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में आर्थिक रूप से मजबूत और प्रभावशाली आरोपियों द्वारा प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों को चुनौती देने के बढ़ते ट्रेंड पर गहरी चिंता जताई है। कोर्ट ने इसे ट्रायल से बचने की रणनीति करार देते हुए कहा कि इस प्रथा को रोकना चाहिए।
सीजेआई सूर्य कांत की बेंच का फैसला
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरोपी दिल्ली के वकील गौतम खैतान की याचिका खारिज कर दी। खैतान ने PMLA की धारा 44(1)(c) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी, जो शेड्यूल्ड अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग अपराध को एक साथ स्पेशल कोर्ट में ट्रायल करने का प्रावधान करती है।
सीजेआई ने कहा, “यह अब एक अनोखा ट्रेंड बन गया है कि ट्रायल चलते समय अमीर और प्रभावशाली लोग अदालत आकर कानून की वैधता चुनौती देते हैं। सिर्फ इसलिए कि मैं अमीर हूं, मैं कानून को चुनौती दूंगा… यह प्रथा बंद होनी चाहिए। यदि आप आरोपी हैं, तो आम नागरिक की तरह ट्रायल का सामना करें।”
वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने खैतान का पक्ष रखा, लेकिन कोर्ट ने याचिका अलग से सुनने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि PMLA प्रावधानों की वैधता पर विजय मदनलाल चौधरी केस में रिव्यू पिटिशन्स पहले से लंबित हैं, इसलिए इस मुद्दे को वहां ही परीक्षण किया जाएगा।
भूपेश बघेल का उदाहरण
इससे पहले अगस्त 2025 में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की इसी तरह की याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने ED की आगे जांच के अधिकारों को चुनौती दी थी।
PMLA पर बहस का संदर्भ
PMLA मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने का सख्त कानून है, जो ED को व्यापक अधिकार देता है। हालांकि, इसके प्रावधानों पर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह रुख दर्शाता है कि कानून की वैधता पर लंबित मामलों के बीच अलग-अलग याचिकाएं दाखिल कर ट्रायल टालने की कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।