उत्तर प्रदेशलखनऊ

लखनऊ में खुले नाले ने छीनी पेंटर सुरेश लोधी की जिंदगी, नगर निगम की लापरवाही पर सीएम योगी का सख्त एक्शन

लखनऊ के ठाकुरगंज क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान एक दुखद हादसे ने नगर निगम की लापरवाही को उजागर कर दिया।

राधाग्राम कॉलोनी के मंजू टंडन ढाल के पास खुले नाले में फिसलकर 38-45 वर्षीय पेंटर सुरेश लोधी की मौत हो गई। 28-30 घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद उनका शव रविवार, 13 जुलाई को आईआईएम रोड के पास बंधे पर गऊघाट के निकट गोमती नदी के किनारे बरामद हुआ। इस घटना ने प्रशासन और नगर निगम की तैयारियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

सुरेश लोधी, जो राधाग्राम कॉलोनी के निवासी थे, शनिवार सुबह करीब 7 बजे अपनी दुकान पर काम के लिए निकले थे। भारी बारिश के कारण सड़कों पर जलभराव था, और मंजू टंडन ढाल के पास नाले का स्लैब टूटा हुआ था। जलभराव के कारण स्लैब दिखाई नहीं दिया, और सुरेश फिसलकर नाले में गिर गए। तेज बहाव के कारण वे बह गए, और स्थानीय लोगों की कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाले का ढक्कन महीनों से हटा हुआ था, और इसकी शिकायत स्थानीय पार्षद और नगर निगम से कई बार की गई थी।

नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही
स्थानीय लोगों और सुरेश की पत्नी रेनू लोधी ने आरोप लगाया कि नाले की सफाई और ढक्कन लगाने की मांग को बार-बार अनदेखा किया गया। रेनू ने बताया कि उन्होंने खुद अपने पैसे से घर के सामने का नाला ढकवाया था, लेकिन मंजू टंडन रोड पर खुले नाले को ठीक करने की कोई कार्रवाई नहीं हुई। नगर निगम ने दावा किया था कि मानसून से पहले नालों की सफाई की गई, लेकिन हादसे ने इन दावों की पोल खोल दी। स्थानीय लोगों ने बताया कि नाले की सफाई के दौरान 20 जगहों पर स्लैब टूट गए थे, लेकिन उनकी मरम्मत या प्रतिस्थापन के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।

सर्च ऑपरेशन में लापरवाही
हादसे की सूचना के बाद नगर निगम, पुलिस, और SDRF की टीमें मौके पर पहुंचीं, लेकिन सर्च ऑपरेशन में देरी और असंवेदनशीलता की शिकायतें सामने आईं। शनिवार शाम 7 बजे सर्च ऑपरेशन रोक दिया गया, और रविवार सुबह 11 बजे तक टीमें दोबारा मौके पर पहुंचीं। इस बीच, स्थानीय सफाईकर्मी बुद्धा ने सुबह 5 बजे नाले में सुरेश का शव देखा और परिजनों को सूचित किया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने कड़ी मशक्कत के बाद शव निकाला, लेकिन नगर निगम की टीम एक घंटे बाद पहुंची।

प्रदर्शन और लाठीचार्ज
सुरेश के लापता होने की खबर फैलने के बाद स्थानीय लोगों ने शनिवार रात 11 बजे हरदोई रोड पर सेंट जोसेफ स्कूल के सामने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। गुस्साए लोगों ने नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी की। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया, जिसमें सुरेश की पत्नी रेनू सहित कई परिजन घायल हो गए। इस घटना ने स्थानीय लोगों में और आक्रोश पैदा किया।

सीएम योगी का सख्त एक्शन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण बताया। उन्होंने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, जिसके बाद:

  • जूनियर इंजीनियर (JE) रमन कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया।
  • सहायक अभियंता (AE) आलोक कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
  • ठेकेदार अंकित कुमार और उनकी कंपनी अनिका इंटरप्राइजेज के खिलाफ FIR दर्ज की गई, और कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया गया।
  • स्थानीय पार्षद सीबी सिंह पर भी सुरेश की पत्नी रेनू द्वारा FIR दर्ज की गई, जिसमें लापरवाही का आरोप लगाया गया।
  • पीड़ित परिवार को 9 लाख रुपये की आर्थिक सहायता (5 लाख मुख्यमंत्री राहत कोष से और 4 लाख आपदा राहत कोष से) और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान देने की घोषणा की गई।

सीएम योगी ने कहा, “यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक प्रणाली की गंभीर चूक है। जनता की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा।” उन्होंने नगर विकास विभाग को लापरवाही की गहन जांच और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए।

परिवार का दर्द
सुरेश की पत्नी रेनू और उनके तीन छोटे बच्चे अब बेसहारा हो गए हैं। रेनू ने कहा, “हम बेटी की शादी के लिए पैसे जोड़ रहे थे। अब परिवार का क्या होगा?” सुरेश अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे और पड़ोसियों के लिए हमेशा मददगार रहते थे। उनके निधन से मोहल्ले में शोक की लहर है।

नगर निगम की प्रतिक्रिया
महापौर सुषमा खर्कवाल ने घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि नागरिकों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने शहरभर में खुले नालों और मैनहोलों को ढकने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। नागरिकों से टोल-फ्री नंबर 1533 पर खुले नालों की शिकायत दर्ज करने की अपील की गई है।

शहर में खुले नालों का खतरा
यह हादसा लखनऊ में खुले नालों और मैनहोलों की गंभीर समस्या को उजागर करता है। गऊघाट, बंगला बाजार, दरिया वाली मस्जिद, और इंदिरानगर जैसे क्षेत्रों में भी खुले नाले हादसों को न्योता दे रहे हैं। पिछले साल भी नशरा नाम की एक बच्ची की इसी तरह नाले में गिरकर मौत हो गई थी, लेकिन व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ।

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