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नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया-राहुल को बड़ी राहत, कांग्रेस ने कहा ‘सत्य की जीत’

नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि यह मामला निजी शिकायत पर आधारित है, न कि किसी प्राथमिकी (FIR) पर, इसलिए पीएमएलए के तहत कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकती। हालांकि, ईडी को जांच जारी रखने की अनुमति दी गई है।

इस फैसले को कांग्रेस ने सत्य की जीत करार दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध और उत्पीड़न की कहानी बताया। उन्होंने कहा कि कानून ने शोर-शराबे से ज्यादा जोर से अपनी बात कही है।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रतिक्रिया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों का दुरुपयोग करके कांग्रेस नेताओं, खासकर गांधी परिवार को बदनाम और परेशान कर रही है। इस मामले में कोई आधार नहीं है, कोई FIR नहीं थी, फिर भी निजी शिकायत पर कार्रवाई की गई। खड़गे ने आरोप लगाया कि बेबुनियाद मामलों में दम भरकर कांग्रेस के 50 से अधिक बड़े नेताओं को सताया जा रहा है। कई नेताओं को धनशोधन के मुकदमों से अपनी ओर खींचा गया, सांसदों को तोड़ा गया और कई राज्यों में सरकारें बनाई गईं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में खड़गे ने कहा, “इस फैसले के बाद मोदी और शाह को इस्तीफा दे देना चाहिए, क्योंकि यह उनके चेहरे पर तमाचा है। ऐसे लोगों को परेशान नहीं करना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा, “हम अंग्रेजों से नहीं डरे, तो भाजपा-आरएसएस या मोदी-शाह क्या चीज हैं? आज कोर्ट ने भी मोदी सरकार की दुर्भावनापूर्ण साजिश को नाकाम कर दिया। सत्य की जीत निश्चित है।”

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?

यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुड़ा है, जिसने नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित किया। AJL की स्थापना 1937 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने की थी, ताकि विभिन्न भाषाओं में समाचार पत्र प्रकाशित किए जा सकें। इसमें अंग्रेजी का नेशनल हेराल्ड, हिंदी का नवजीवन और उर्दू का कौमी आवाज शामिल थे। कंपनी को 5000 से अधिक स्वतंत्रता सेनानियों का समर्थन मिला था, जो इसके शेयरहोल्डर भी थे। नेहरू की भूमिका होने के बावजूद मालिकाना हक कभी उनका नहीं रहा।

90 के दशक में अखबार घाटे में चले गए और 2008 तक AJL पर 90 करोड़ से अधिक का कर्ज हो गया। तब प्रकाशन बंद कर दिया गया और कंपनी प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी। आरोप है कि यंग इंडियन कंपनी (जिसमें सोनिया और राहुल की हिस्सेदारी है) ने AJL की संपत्तियों को हड़प लिया। ईडी ने इसे 2000 करोड़ की संपत्ति हड़पने का मामला बताया था। मामला सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत से शुरू हुआ।

हालांकि ईडी इस फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी कर रही है।

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