
नोएडा में साइबर अपराधियों ने ठगी की एक बेहद गंभीर और हैरान करने वाली वारदात को अंजाम दिया है। जालसाजों के इस गिरोह ने दिल्ली के प्रतिष्ठित सफदरजंग अस्पताल के पूर्व निदेशक और 83 वर्षीय सेवानिवृत्त डॉ. वीएच तालिब को अपना शिकार बनाया।
ठगों ने खुद को खुफिया ब्यूरो (IB) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर डॉक्टर को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे मामले में फंसाने की भारी धमकी दी। अपराधियों ने इस कदर खौफ पैदा किया कि उन्होंने बुजुर्ग डॉक्टर को लगातार सात दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ (कैमरे की निगरानी में कैद) रखा और उनसे करीब 49 लाख रुपये की मोटी रकम ऐंठ ली।
इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए जालसाजों ने बेहद शातिर और सुनियोजित तरीका अपनाया। पीड़ित का विश्वास जीतने और उन पर मानसिक दबाव बनाने के लिए ठगों ने उन्हें फर्जी सीबीआई लेटर भेजे और बाकायदा वीडियो कॉल के जरिए एक ‘फर्जी अदालत’ में उनकी ऑनलाइन पेशी भी करवाई।
अपराधियों की संवेदनहीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 83 वर्षीय डॉ. तालिब के साथ-साथ उनकी कैंसर पीड़ित बुजुर्ग पत्नी को भी लगातार कैमरे के सामने बैठने के लिए मजबूर किया और उनकी हर हरकत पर निगरानी रखी। इसी मानसिक प्रताड़ना और खौफ के साए में ठगों ने आरटीजीएस (RTGS) के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में 49 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।
इस खौफनाक साइबर अपराध का पर्दाफाश तब हुआ जब अमेरिका में पेशे से डॉक्टर उनकी तीन बेटियों में से एक का फोन आया और बातचीत के दौरान इस ‘डिजिटल अरेस्ट’ की पूरी हकीकत सामने आई। बेटी के हस्तक्षेप और समझाने के बाद डॉ. तालिब को ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने बिना कोई देरी किए स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर मामले की औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
ज्ञात हो कि डॉ. वीएच तालिब ने सफदरजंग अस्पताल में करीब 30 वर्षों तक अपनी अमूल्य सेवाएं दी हैं और वह चिकित्सा जगत का एक जाना-माना नाम हैं। फिलहाल, पुलिस ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है और इस हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी मामले की कड़ियां जोड़ने में जुट गई है।




