
वाराणसी के केदार घाट स्थित विद्यामठ में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने गौ हत्या और सनातन धर्म पर हो रहे अत्याचार रोकने के लिए ‘चतुरंगिणी सेना’ का गठन किया है।
इस सेना के पहले चरण में 27 लोगों को शामिल किया गया है। शंकराचार्य खुद इसका प्रमुख होंगे। सेना का मुख्य काम “टोको, रोको और ठोको” के तर्ज पर होगा। सदस्य पीले वस्त्र पहनेंगे और भगवान परशुराम की तरह परशु (कुल्हाड़ी) धारण करेंगे।
शंकराचार्य ने बताया कि अगले 10 महीनों में इस सेना का पूरे उत्तर प्रदेश और देशभर में विस्तार किया जाएगा। करीब 2 लाख 18 हजार 700 लोगों को इसमें शामिल करने की योजना है। सेना की पहली झांकी माघ मेले में देखने को मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आज हिंदुओं के मन में भय व्याप्त है, इस सेना का मकसद उस भय को दूर करना और सत्य का मार्ग दिखाना है। सेना का रजिस्ट्रेशन होगा और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा। परशु धारण करने के लिए अगर लाइसेंस की जरूरत पड़ी तो वह भी लिया जाएगा।



