
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के युवा नेताओं की गिरफ्तारी और उन्हें जेल भेजे जाने की घटना ने एक बड़े राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। इस पुलिस कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान देश का तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। युवाओं की आवाज को दबाने और उन्हें जेल भेजने की इस कार्रवाई को उन्होंने पूरी तरह से कायरतापूर्ण करार देते हुए देश में संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया है।
कांग्रेस नेता ने अपने बयान में कहा कि आज देश में छात्र, युवा, पत्रकार और विपक्षी ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के नेता भले ही अलग-अलग मंचों या बैनरों के तले अपना विरोध दर्ज करा रहे हों, लेकिन उन सभी की मूल लड़ाई एक ही है। यह साझा लड़ाई देश के संवैधानिक मूल्यों और अधिकारों को बचाने की है। जंतर-मंतर पर आम जनता के अधिकार को लेकर बड़ा ऐलान करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह ऐतिहासिक प्रदर्शन स्थल भारत की जनता की अमानत है और इसे हर हाल में वापस हासिल किया जाएगा।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस हिरासत की बात करें तो, मंगलवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सीजेपी के तीन प्रमुख सदस्यों—आशुतोष रांका, सौरव दास और अजिंक्य शिंदे—को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। पुलिस के अनुसार, इन नेताओं पर पूर्व में निर्धारित बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप है। इसी मामले में बुधवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई हुई, जहां से आशुतोष रांका और सौरव दास को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है, जबकि तीसरे सदस्य अजिंक्य शिंदे को अदालत से जमानत मिल गई है।
युवा नेताओं की इस गिरफ्तारी और हिरासत ने देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के अधिकार, तिरंगा फहराने की स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक नई और तेज बहस छेड़ दी है। राहुल गांधी द्वारा इस मुद्दे को मुखरता से उठाने के बाद अब राजनीतिक हलकों के साथ-साथ आम जनता की नजरें भी इस मामले की आगामी कानूनी प्रक्रिया और जेल भेजे गए नेताओं की रिहाई पर टिकी हुई हैं।



