उत्तर प्रदेश

सियासी हलचल: ओम प्रकाश राजभर का कांग्रेस पर ‘वोट चोरी’ का आरोप और पूर्वांचल राज्य पर किया बड़ा दावा

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने बेबाक और अक्सर विवादित बयानों के लिए पहचाने जाने वाले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के मुखिया और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने एक बार फिर सूबे का सियासी पारा चढ़ा दिया है। राजधानी लखनऊ में मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने वर्तमान राजनीतिक हालात और विपक्ष के निरंतर हमलों पर खुलकर अपनी बात रखी।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार का पुरजोर बचाव करते हुए राजभर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई भी अनुचित कार्य नहीं किया है और वे पूरी तरह से पाक-साफ हैं। विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए जा रहे सवालों को उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। राजभर ने यह दावा भी किया कि हालिया सर्वेक्षणों में यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का पूरी तरह से सूपड़ा साफ होने जा रहा है। उनका मानना है कि अपनी इसी संभावित करारी हार की बौखलाहट को छिपाने के लिए विपक्षी नेता चुनाव आयोग पर ऐसे बेबुनियाद आरोप मढ़ रहे हैं।

अपनी बयानबाजी को और अधिक धार देते हुए सुभासपा अध्यक्ष ने कांग्रेस पार्टी और विशेषकर राहुल गांधी को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी पर लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ करने का अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारत में ‘वोट चोरी’ की कुप्रथा की शुरुआत असल में कांग्रेस ने ही की थी। राजनीतिक इतिहास का हवाला देते हुए राजभर ने यहां तक कह दिया कि देश की पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत इंदिरा गांधी भी इसी वोट चोरी के हथकंडे को अपनाकर सत्ता के शीर्ष तक पहुंची थीं।

इसके अलावा, उन्होंने रायबरेली में आयोजित हुए कांग्रेस के हालिया राजनीतिक आयोजनों की भी असलियत उजागर करने का दावा किया। राजभर के अनुसार, रायबरेली की जनसभाओं में भीड़ दिखाने के लिए आस-पास के करीब बीस अलग-अलग जिलों से लोगों को ढोकर लाया गया था। उनका कहना है कि इस दिखावे से यह साबित हो गया है कि जनता के बीच विपक्ष का वास्तविक जनाधार खिसक चुका है।

इन तमाम राजनीतिक हमलों और तीखी टिप्पणियों के बीच ओम प्रकाश राजभर ने भविष्य की राजनीति और उत्तर प्रदेश के संभावित विभाजन से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर भी एक बड़ी भविष्यवाणी की। अलग पूर्वांचल राज्य के गठन की पुरानी मांग को एक बार फिर से हवा देते हुए उन्होंने अत्यंत आत्मविश्वास के साथ ऐलान किया कि भविष्य में जब भी उत्तर प्रदेश का बंटवारा कर पूर्वांचल को एक स्वतंत्र राज्य का दर्जा दिया जाएगा, तब वहां की कमान किसी और के हाथ में नहीं होगी, बल्कि राजभर का बेटा ही वहां का मुख्यमंत्री बनेगा।

सुभासपा प्रमुख के इस अति-महत्वाकांक्षी दावे ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस और चर्चाओं का दौर शुरू कर दिया है। उनके इन सीधे और बेबाक बयानों से राज्य के सियासी माहौल में काफी गर्मी आ गई है, और अब स्वाभाविक रूप से विरोधी दलों की तरफ से भी इस पर तीखी प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है।

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