
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया आज (29 सितंबर) से शुरू हो रही है, जिसके चलते 16 अक्टूबर को होने वाले मतदान से पहले राज्य में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकते हैं, जिसमें प्रत्येक उम्मीदवार को अधिकतम चार सेट जमा करने की अनुमति है, और प्रत्येक सेट पर 10 विधायकों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं। समाजवादी पार्टी ने अपने विधायकों को लखनऊ में ही रहने को कहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कोर कमेटी की बैठक की है और जल्द ही अपने उम्मीदवारों की घोषणा करने की उम्मीद है।
एनडीए में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), अनुप्रिया पटेल की अपना दल (सोनेलाल), जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी), ओम प्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) और संजय निषाद की निषाद पार्टी शामिल हैं। इसके 294 विधायक हैं। 294 विधायकों के साथ एनडीए आसानी से सात सीटें जीत सकता है, हालांकि आठवीं सीट के लिए उसे दो वोटों की कमी होगी, जिससे गतिरोध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पास कुल 103 विधायक हैं। सपा-कांग्रेस गठबंधन दो सीटें जीत सकता है, लेकिन तीसरी सीट पर जीत अतिरिक्त समर्थन, क्रॉस वोटिंग और दूसरी वरीयता के वोटों पर निर्भर करेगी।
राज्यसभा चुनाव 16 अक्टूबर को होंगे
जैसे-जैसे 16 अक्टूबर की मतदान तिथि नजदीक आ रही है, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और भी तीव्र होने की उम्मीद है। पार्टियां उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन और छोटी पार्टियों तथा निर्दलीय विधायकों के समर्थन जुटाने में जुटी हैं। राज्यसभा चुनाव उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले हो रहे हैं, जिससे इस मुकाबले का राजनीतिक महत्व और भी बढ़ जाता है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। इनमें से आठ सीटें वर्तमान में भाजपा के पास हैं, जबकि समाजवादी पार्टी (एसपी) और बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) के पास एक-एक सीट है। उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के 10 सदस्य इस साल नवंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।



