
त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही उत्तर प्रदेश के आगरा में आम जनता और व्यापारियों के लिए एक बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। रोशनी और मिठास के पर्व दिवाली से ठीक पहले शहर में चीनी की आपूर्ति पिछले सात दिनों से पूरी तरह ठप पड़ी है। इस गंभीर संकट के कारण थोक और फुटकर बाजार में चीनी के दाम आसमान छूने लगे हैं और फुटकर बाजार में इसका भाव 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है। आपूर्ति न होने और स्टॉक लगातार गिरने से शहर के मशहूर पेठा उद्योग और हजारों मिठाई कारोबारियों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं।
इस गंभीर होते संकट के पीछे चीनी मिल मालिकों की मनमानी और बाजार में बैठे बड़े एजेंट्स की जमाखोरी को मुख्य कारण माना जा रहा है। आगरा खंडसारी एंड शुगर डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गिर्राज अग्रवाल का स्पष्ट आरोप है कि चीनी मिलें अपना माल केवल कुछ चुनिंदा एजेंट्स के माध्यम से ही बेच रही हैं।
मिलों द्वारा जारी किए जाने वाले मासिक कोटे की शासन और प्रशासन स्तर पर कोई सख्त जांच न होने का पूरा फायदा उठाया जा रहा है, जिससे बाजार में जानबूझकर चीनी की कृत्रिम कमी पैदा करने वाला एक बड़ा सिंडिकेट सक्रिय हो गया है। स्थानीय आपूर्ति के साथ-साथ बाहरी राज्यों से आने वाली सप्लाई चेन भी बुरी तरह चरमरा गई है। नूरी गेट के व्यापारी विनोद अग्रवाल के अनुसार, महाराष्ट्र से आने वाली चीनी की गाड़ियां पिछले एक सप्ताह से रास्ते में ही फंसी हुई हैं और उन तक माल नहीं पहुंच सका है।
बाजार में चीनी की इस कृत्रिम किल्लत ने सरकारी दावों और तय कीमतों की भी पोल खोल दी है। सरकार द्वारा चीनी मिलों के लिए 45 से 46 रुपये प्रति किलो का भाव निर्धारित किया गया है, लेकिन बाजार में यह बेतहाशा और मनमाने दामों पर बेची जा रही है। वर्तमान में डबल रिफाइंड सफेद चीनी का थोक भाव 59 से 60 रुपये प्रति किलो चल रहा है, जो आम उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते 62 रुपये प्रति किलो हो गया है। इसी तरह सिंगल रिफाइंड चीनी 57 रुपये प्रति किलो और सरकारी मिलों की हल्की गुणवत्ता वाली चीनी भी 52 से 55 रुपये प्रति किलो के ऊंचे थोक भाव पर बिक रही है।
आगरा शहर में रोजाना करीब तीन हजार कुंतल चीनी की भारी खपत होती है, लेकिन मंगलवार तक थोक विक्रेताओं के गोदामों में बमुश्किल चार से पांच हजार कुंतल का ही स्टॉक शेष बचा है। यदि शुक्रवार तक नई खेप बाजार में नहीं पहुंचती है, तो आम आदमी की रसोई से लेकर शहर के 2000 से अधिक हलवाइयों और मिठाई विक्रेताओं का कामकाज पूरी तरह ठप हो जाएगा। चीनी की इस भयानक किल्लत का सीधा असर पेठा फैक्ट्रियों पर पड़ना शुरू हो गया है।
पेठा कारोबारी अमित गोयल बताते हैं कि चीनी उपलब्ध न होने के कारण फैक्ट्रियों में उत्पादन रुकने लगा है, वहीं स्वीट्स एंड नमकीन एसोसिएशन के अध्यक्ष राजकुमार भगत ने चेतावनी दी है कि यदि त्योहार से पहले बाजार में पर्याप्त चीनी नहीं उतरी तो पूरा कारोबारी सीजन बर्बाद हो जाएगा।



