
हरियाणा पुलिस के विजिलेंस ब्यूरो ने 590 करोड़ रुपये की बड़ी बैंक फ्रॉड मामले में बड़ा खुलासा किया है। चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मुख्य साजिशकर्ता रिभव रिषि (पूर्व IDFC फर्स्ट बैंक मैनेजर, अब AU स्मॉल फाइनेंस बैंक चंडीगढ़ में कार्यरत) शामिल है।
अन्य गिरफ्तार: अभय कुमार, स्वाति सिंघला और अभिषेक सिंघला। इनमें से दो पूर्व IDFC बैंक अधिकारी हैं, जबकि बाकी एक पार्टनरशिप फर्म चलाने वाले निजी व्यक्ति हैं।
ठगी का तरीका: आरोपियों ने शेल कंपनियां बनाकर और बैंकिंग प्रक्रियाओं में हेरफेर कर हरियाणा सरकार के विभागों से जुड़े खातों से 590 करोड़ रुपये निकाल लिए। सितंबर 2025 में मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना-2.0 के तहत IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक में दो खाते खोले गए थे, जिनमें 50 करोड़ और 25 करोड़ जमा हुए थे। ये राशि बिना सरकारी अनुमति के नहीं निकाली जा सकती थी।
जनवरी में खातों को बंद करने के आदेश पर AU बैंक ने पूरा पैसा (25.45 करोड़) लौटा दिया, लेकिन IDFC बैंक ने सिर्फ 1.27 करोड़ ट्रांसफर किया, जिससे जांच शुरू हुई और बड़ा घोटाला सामने आया।
बैंक का बयान: IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा कि धोखाधड़ी से ट्रांसफर हुई 583 करोड़ रुपये की राशि 24 घंटे के अंदर हरियाणा सरकार को वापस कर दी गई है।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बताया कि सरकार और बैंकों के समन्वय से ब्याज सहित पूरी राशि वसूल की गई। राज्य ने IDFC फर्स्ट बैंक और AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को सरकारी कामों से हटा दिया है।
विपक्ष ने CBI जांच की मांग की है। विजिलेंस ब्यूरो जांच जारी रखे हुए है और बाकी फंड्स की तलाश कर रहा है।



