
उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में पुलिस की कथित लापरवाही और दबंगों के हौसले का एक बेहद खौफनाक मामला सामने आया है। मऊ थाना क्षेत्र के एक गांव में 17 वर्षीय दलित किशोरी से छेड़छाड़ की शिकायत करना उसके परिवार को भारी पड़ गया। शिकायत से बौखलाए आरोपी ने रविवार रात करीब 9:30 बजे हथियार के साथ पीड़िता के घर में घुसकर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
इस जानलेवा हमले में किशोरी की चाची की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उसके चाचा गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल चाचा की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें मऊ सीएचसी से प्रयागराज रेफर कर दिया गया है। वहीं, इस जघन्य वारदात के बाद देर रात भागते समय आरोपी ने खुद को भी गर्दन में गोली मार ली, जिसके बाद उसे भी गंभीर हालत में प्रयागराज के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इस पूरे हत्याकांड के पीछे स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर और सीधे सवाल खड़े हो रहे हैं। पीड़ित परिजनों के अनुसार, शनिवार को किशोरी की मां ने गांव के ही रहने वाले श्याम आधार मिश्रा के खिलाफ बेटी से छेड़छाड़ की लिखित तहरीर दी थी। पुलिस ने मामले में पॉक्सो, एससी/एसटी एक्ट और छेड़छाड़ जैसी गंभीर धाराओं में एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन आरोपी का चालान महज ‘शांतिभंग’ (151) की मामूली धारा में कर दिया।
पुलिस की इस मेहरबानी के चलते उसे शनिवार को ही आसानी से जमानत मिल गई। जेल जाने से बचने और तुरंत छूटने के बाद आरोपी के हौसले इस कदर बुलंद हुए कि उसने सीधे घर में घुसकर मौत का खेल खेल दिया।
फायरिंग की आवाज सुनकर जब तक आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचते, तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुका था। वारदात की सूचना मिलते ही एसपी अरुण कुमार सिंह, सीओ फहद अली और थाना प्रभारी राजेश प्रताप सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। पीड़ित परिवार का सीधा आरोप है कि पुलिस ने मामले में शुरू से ही लीपापोती की और स्थानीय दरोगा की आरोपी के साथ स्पष्ट मिलीभगत थी।
परिजनों का कहना है कि अगर पुलिस ने संगीन धाराओं के तहत आरोपी को जेल भेजा होता, तो आज एक निर्दोष महिला की जान नहीं जाती। फिलहाल गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।



