विर दास की ‘हैपी पटेल: खतरनाक जासूस’ फिल्म ने दिखाया है कि स्मार्ट तरीके से लिखी गई मूर्खता कितनी कमाल की हो सकती है। क्वर्की जोक्स से लेकर हार्टवार्मिंग मोमेंट्स तक, यह फिल्म अब्सर्ड कॉमेडी का एक रेयर और मजेदार उदाहरण है।
अक्सर इस तरह की फिल्मों को ‘नो-ब्रेनर’ या ‘ब्रेन-रॉट’ सिनेमा कहकर खारिज कर दिया जाता है, लेकिन इसमें जीनियस की जरूरत होती है—और विर दास ने इसे साबित कर दिया है।
यह फिल्म मदगांव एक्सप्रेस और गो गोआ गॉन के बीच कहीं फिट बैठती है—दोनों ही अच्छी तरह रिसीव हुई फिल्में, जहां एक कल्ट क्लासिक बनी और दूसरी हाल की अब्सर्ड कॉमेडी का बेहतरीन उदाहरण। हैपी पटेल मॉडर्न, सेल्फ-अवेयर लेखन का नमूना है और बॉक्स ऑफिस पर अपनी परफॉर्मेंस से कल्ट स्टेटस की ओर बढ़ रही है।
फिल्म क्या अच्छी बनाती है?
- शॉर्ट और क्रिस्प रनटाइम — सिर्फ 2 घंटे का रनटाइम, कोई लैग नहीं। कॉमेडी सेट पीसेस, थोड़ी इमोशन और अनप्रेडिक्टेबल एक्शन से फिल्म ब्रीजी और एंगेजिंग रहती है।
- प्लॉट (जोक्स हटाकर) — MI7 के दो जासूस भारत में एक ऑर्फन बच्चे को गोद लेते हैं और इंग्लैंड ले जाते हैं। बड़ा होकर हैपी पटेल (विर दास) अपने पैरेंट्स की लिगेसी जीना चाहता है, लेकिन फेल होता रहता है। आखिरकार भारत में हाई-रिस्क मिशन पर भेजा जाता है, जहां वह एक स्ट्रगलिंग आर्टिस्ट से प्यार कर बैठता है—जो डबल एजेंट निकलती है, लेकिन सही साइड पर। साथ मिलकर वे विलेन (मामा, मोना सिंह) को हराते हैं और हैपी भारत में ही रहने का फैसला करता है। बेसिक स्पाई स्टोरी, लेकिन सेल्फ-अवेयर स्पूफ के साथ।
- टेक्निकल ब्रिलियंस — एडिटिंग इनोवेटिव और क्वर्की स्क्रीनप्ले से मैच करती है। म्यूजिक और लिरिक्स भी जोक्स, सटायर और ग्रूवी बीट्स से भरे हैं।
- इमोशन का टच — जोक्स के बीच रिलेटेबल लव स्टोरी, हैपी की इनोसेंस, बिलॉन्गिंग की फीलिंग—यह फिल्म सिर्फ हंसी नहीं, थोड़ी गर्माहट भी देती है।
- विर दास का कमाल — एम्मी अवॉर्ड विनर के स्टैंड-अप स्टाइल से मैचिंग ह्यूमर। क्रूड जोक्स भी सेल्फ-पोक के साथ। डायरेक्टोरियल डेब्यू (कवि शास्त्री के साथ) भी शानदार।
क्या बनाता है इसे ब्रिलियंट?
कॉमेडी सब्जेक्टिव है, लेकिन सफल फिल्में जैसे गोलमाल, हाउसफुल, वेलकम और धमाल अच्छी राइटिंग से अलग होती हैं। हैपी पटेल में क्लियर इंटेंट है—डायलॉग्स मीनिंगफुल, कैरेक्टर्स पॉप कल्चर रेफरेंस देते हैं, हाल की बॉलीवुड ट्रेंड्स का मजाक उड़ाते हैं। जैसे रणवीर सिंह के एनिमल लुक वाला हेयरस्टाइल, ‘आज बन्दा तेरे लिए नाचेगा’ वाला आइटम नंबर, या सैंडविच बनाते हुए बैले।
कैमियो — आमिर खान और इमरान खान के छोटे लेकिन इंपैक्टफुल रोल्स (इमरान का एक्शन पैक्ड कमबैक फनी है)। लेकिन मुख्य कास्ट चमकती है: मिथिला पालकर (रूपा), शरिब हाशमी (गीत), सृष्टि तावड़े (रॉक्सी), मोना सिंह (मामा)। सब्सिडियरी कैरेक्टर्स भी मजेदार ट्रेट्स से भरे हैं।
यह फिल्म हमारा अपना जॉनी इंग्लिश है—देसी, नाइव, इंडियन स्पाइसेस वाला, लेकिन राइटिंग की ताकत से मजबूत।


