उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। बृहस्पतिवार को एंटी करप्शन (भ्रष्टाचार निवारण) टीम ने सिंचाई विभाग के एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आशीष माथुर को छह हजार रुपये की घूस लेते हुए रंगे हाथ दबोच लिया।
यह सख्त कदम विभाग से ही हाल ही में सेवानिवृत्त हुए एक बुजुर्ग कर्मचारी की शिकायत पर उठाया गया, जिसे अपने हक़ के पैसों के लिए विभागीय बाबुओं द्वारा लगातार परेशान किया जा रहा था। इस सफल ट्रैप ने सरकारी कार्यालयों में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के साथ होने वाले शोषण और फैले हुए भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है।
इस पूरे मामले के पीड़ित सिंचाई विभाग के पूर्व कर्मचारी भूप सिंह हैं, जो इसी साल जून महीने में अपने पद से रिटायर हुए थे। अपनी सेवा के दौरान जमा किए गए जनरल प्रोविडेंट फंड (जीपीएफ) की लगभग तीन लाख रुपये की धनराशि प्राप्त करने के लिए वह पिछले तीन महीनों से लगातार विभागीय कार्यालय के चक्कर काट रहे थे। बुढ़ापे में उन्हें अपने ही हक के पैसों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा था। इसी मजबूरी का फायदा उठाते हुए विभाग में जीपीएफ की फाइलें देख रहे कर्मचारी आशीष माथुर ने उनकी फाइल को आगे बढ़ाने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी कराने के एवज में अनुचित लाभ की मांग कर डाली।
बार-बार की प्रताड़ना से तंग आकर भूप सिंह ने रिश्वत देने के बजाय एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया और आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की सत्यता परखने के बाद टीम ने घूसखोर को रंगे हाथ पकड़ने का जाल बिछाया।
तय योजना के अनुसार, बृहस्पतिवार के दिन एंटी करप्शन टीम ने भूप सिंह को छह हजार रुपये के नोटों पर एक विशेष केमिकल लगाकर कार्यालय भेजा। जैसे ही भूप सिंह ने आरोपी आशीष माथुर को वह रकम थमाई और उसने पैसे लिए, पहले से ही घात लगाए बैठी टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। केमिकल लगे नोटों ने आरोपी का अपराध मौके पर ही सिद्ध कर दिया।
एंटी करप्शन थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार ने इस पूरी कार्रवाई की जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी कर्मचारी के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराने की विधिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इसके अलावा पुलिस और जांच दल इस बात की भी गहनता से पड़ताल कर रहे हैं कि इस घूसखोरी के मामले में केवल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही शामिल था या इसके तार विभाग के अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों से भी जुड़े हुए हैं।



