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ब्रिटेन ने ट्रंप को ईरान हमले के लिए RAF Fairford बेस इस्तेमाल करने से रोका, दिया अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला

ब्रिटेन की कीर स्टार्मर सरकार ने अमेरिका की उस मांग को ठुकरा दिया है जिसमें RAF Fairford (ग्लौस्टरशायर, स्विंडन के पास) बेस से ईरान पर संभावित लंबी दूरी के बमबारी हमलों के लिए अनुमति मांगी गई थी। ब्रिटिश सरकार का मानना है कि ईरान पर पूर्व-निवारक (pre-emptive) हमले अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकते हैं।

BBC और The Times की रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमले की आकस्मिक योजनाएं तैयार की हैं। RAF Fairford अमेरिका के भारी बॉम्बर्स (जैसे B-52) के लिए यूरोप में प्रमुख आधार है। ब्रिटेन ने Diego Garcia बेस (चागोस द्वीप) के साथ भी ऐसी अनुमति देने से इनकार किया है।

ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर चेतावनी दी कि अगर ईरान डील नहीं करता तो अमेरिका इन बेसों का इस्तेमाल कर सकता है, क्योंकि ईरान से ब्रिटेन और अन्य सहयोगी देशों पर हमला हो सकता है। इस इनकार के बाद ट्रंप ने स्टार्मर के चागोस द्वीप समझौते (मॉरीशस को सौंपने का) का समर्थन वापस ले लिया, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा है।

ब्रिटिश वकीलों की सलाह है कि बिना स्पष्ट खतरे के ऐसे हमले UN चार्टर (अनुच्छेद 51) का उल्लंघन होंगे, और ब्रिटेन को सहयोगी के रूप में जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। पिछले साल भी ब्रिटेन ने ईरान पर अमेरिकी हमलों में हिस्सा नहीं लिया था।

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