
ईरान में बढ़ते अशांति, विरोध प्रदर्शन और संचार ब्लैकआउट के बीच कई भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट आए। सरकार की त्वरित कार्रवाई और सलाहकारियों की सराहना करते हुए लौटे भारतीयों और उनके परिवारों में राहत की लहर है।
शुक्रवार देर रात इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भावुक मंजर देखने को मिला, जहां ईरान से लौटे भारतीयों का स्वागत हुआ। पिछले कुछ दिनों में विदेश मंत्रालय और तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों को उपलब्ध परिवहन साधनों से जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी थी। सरकार ने स्पष्ट कहा कि वह स्थिति पर नजर रख रही है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने को प्रतिबद्ध है।
लौटे एक भारतीय ने कहा, “वहां हालात बहुत खराब हैं। भारत सरकार बहुत सहयोग कर रही है। दूतावास ने हमें जल्द से जल्द निकलने की जानकारी दी। मोदी जी हैं तो हर चीज मुमकिन है।”
दूसरे एक नागरिक ने बताया, “हम वहां एक महीने से थे, लेकिन पिछले एक-दो हफ्तों में ही परेशानियां शुरू हुईं।
बाहर निकलते ही प्रदर्शनकारी गाड़ियों के सामने आ जाते और परेशान करते। इंटरनेट पूरी तरह बंद हो गया था, जिस वजह से परिवार को कोई जानकारी नहीं दे पाए। बहुत चिंता हुई, दूतावास से भी संपर्क नहीं हो पा रहा था।”
ईरान में क्या हो रहा है?
ईरान में अशांति की शुरुआत 28 दिसंबर को तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जब ईरानी रियाल का मूल्य रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद विरोध प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए। आर्थिक संकट के पीछे पानी की कमी, बिजली कटौती, बढ़ती बेरोजगारी और तेजी से बढ़ती महंगाई जैसी कई वजहें हैं, जो जनता के गुस्से को और भड़का रही हैं।
सरकार की सलाह
ईरान में भारतीय दूतावास ने “बदलती स्थिति” का हवाला देते हुए नागरिकों से व्यावसायिक उड़ानों और अन्य उपलब्ध साधनों से निकलने की अपील की। नई दिल्ली स्थित विदेश मंत्रालय ने 5 जनवरी की पहले से जारी सलाह को दोहराते हुए ईरान की यात्रा से बचने और वहां मौजूद लोगों से सतर्क रहने, प्रदर्शनों से दूर रहने की सलाह दी।
आने वाले दिनों में और भारतीयों के लौटने की उम्मीद है। अधिकारी बताते हैं कि दूतावास के साथ समन्वय जारी है और क्षेत्र में तेजी से बदलती स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।



