
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में झूलपुरी गैंगरेप मामले में एक अभूतपूर्व कानूनी कार्रवाई देखने को मिली है। इस संवेदनशील और गंभीर मामले की सुनवाई के लिए जिले के इतिहास में पहली बार देर रात अदालत खोली गई।
त्वरित न्यायिक प्रक्रिया के तहत कड़ी कार्रवाई करते हुए मामले में नामजद सीआरपीएफ (CRPF) और पुलिस के चारों आरोपियों को सीधे जेल भेज दिया गया है। रक्षकों के ही भक्षक बन जाने की इस झकझोर देने वाली घटना और देर रात अदालत में हुई इस त्वरित कार्रवाई को लेकर पूरे इलाके में भारी चर्चा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस घिनौनी वारदात में खाकी वर्दी को दागदार करने वाले सभी आरोपियों पर कानून का शिकंजा कस गया है। देर रात अदालत में पेशी के बाद जिन चार आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है, उनमें इंस्पेक्टर लालाराम, दारोगा संजय, मोहित कुमार और सिपाही प्रमोद शामिल हैं।
पुलिस और सुरक्षा बलों से जुड़े इन सभी आरोपियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई के आधार पर न्यायालय ने इन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश पारित किया, जिसके बाद रातों-रात सभी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया।
मामले की गंभीरता और संवेदनशीलता को देखते हुए पीड़ित युवती की सुरक्षा व उसकी उचित देखभाल को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। प्रशासन ने त्वरित कदम उठाते हुए पीड़िता को आवश्यक आश्रय, सुरक्षा और चिकित्सा परामर्श के लिए अमरोहा स्थित ‘वन स्टॉप सेंटर’ (One Stop Centre) में भेज दिया है।
पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस मामले में आगे की कानूनी कार्यवाही पूरी सख्ती और पारदर्शिता के साथ जारी रहेगी, ताकि दोषियों को उनके किए की कड़ी से कड़ी सजा मिल सके।


