
देश में नवरात्र और आगामी दीपावली के साथ ही फेस्टिव सीजन अपने चरम पर है। लोग बाजारों के साथ-साथ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर जमकर खरीदारी कर रहे हैं। बंपर छूट, कैशबैक और आकर्षक गिफ्ट्स के विज्ञापनों ने ग्राहकों को लुभाना शुरू कर दिया है। लेकिन इसी त्योहारी उत्साह की आड़ में साइबर अपराधियों ने भी अपना जाल बिछा लिया है। फर्जी शॉपिंग वेबसाइट्स, स्पैम लिंक्स और सोशल मीडिया पर भ्रामक विज्ञापनों के जरिए लोगों के बैंक खाते खाली किए जा रहे हैं और हर दिन साइबर क्राइम के नए मामले पुलिस के पास पहुंच रहे हैं।
साइबर क्राइम सिक्योरिटी एडवाइजर डॉ. रक्षित टंडन चेतावनी देते हैं कि त्योहारी सीजन में साइबर ठग पूरी तरह से सक्रिय हो जाते हैं। अपराधी प्रतिष्ठित ई-कॉमर्स कंपनियों की हूबहू नकल कर फर्जी वेबसाइट तैयार करते हैं। सोशल मीडिया पर पांच हजार रुपये के सामान को महज दो हजार रुपये में बेचने जैसे असंभव और लुभावने ऑफर दिए जाते हैं। भारी डिस्काउंट के लालच में आकर जैसे ही ग्राहक ऑनलाइन भुगतान करता है, वह ठगी का शिकार हो जाता है।
डॉ. टंडन सलाह देते हैं कि हमेशा परिचित और प्रामाणिक ब्रांड्स की वेबसाइट या ऐप से ही खरीदारी करें। यदि किसी नए प्लेटफॉर्म पर कोई आकर्षक ऑफर दिख रहा है, तो पहले गूगल पर उसकी समीक्षा (रिव्यू) और शिकायतें जरूर जांच लें। सुरक्षा की दृष्टि से ऐसे मामलों में हमेशा ‘कैश ऑन डिलीवरी’ (COD) का विकल्प ही चुनना चाहिए।
ठगी के मुख्य हथकंडों का विश्लेषण करते हुए डॉ. टंडन बताते हैं कि अपराधी मुख्य रूप से लोगों की मनोवैज्ञानिक भावनाओं का फायदा उठाते हैं—डर, अथॉरिटी (अधिकार), लालच, डेटिंग, ब्लैकमेलिंग और जल्दबाजी (अर्जेंसी)। आजकल ‘डिजिटल अरेस्ट’ के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां ठग खुद को सीबीआई, पुलिस या कस्टम अधिकारी बताकर विशेषकर बुजुर्गों को डराते हैं। वे बैंक खातों में आतंकी लिंक या हवाला के पैसों का झूठा आरोप लगाकर वीडियो कॉल के जरिए पैसे ऐंठते हैं।
इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का दुरुपयोग कर मशहूर हस्तियों के फर्जी वीडियो बनाए जा रहे हैं, जिनमें चंद दिनों में पैसा कई गुना करने का झांसा देकर भारी निवेश करवाया जाता है। वहीं, कूरियर डिलीवरी में देरी या पार्सल कैंसिलेशन का बहाना बनाकर भी फोन कॉल्स के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसाया जा रहा है।
व्हाट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आने वाले मुफ्त लकी ड्रॉ, रिवॉर्ड स्कीम या सर्वे लिंक्स से भी पूरी तरह सतर्क रहने की आवश्यकता है। इन अनजान लिंक्स पर क्लिक करते ही यूजर का मोबाइल फोन या सोशल मीडिया अकाउंट हैकर्स के नियंत्रण में जा सकता है। साइबर सुरक्षा के लिए डॉ. टंडन ‘रुको, जीरो ट्रस्ट करो और वेरिफाई करो’ का मूल मंत्र देते हैं।
यदि कोई परिचित या रिश्तेदार मैसेज पर अचानक अस्पताल में होने का हवाला देकर पैसों की मांग करे, तो बिना फोन पर बात किए कोई भुगतान न करें। हमेशा मजबूत पासवर्ड का उपयोग करें, समय-समय पर उसे बदलते रहें और अपना ओटीपी (OTP) या सीवीवी (CVV) कभी किसी से साझा न करें। यदि पूरी सावधानी बरतने के बावजूद आपके साथ धोखाधड़ी हो जाती है, तो बिना घबराए तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या सरकार के आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।




