
उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों सरकारी जमीनों और ब्रिटिशकालीन विरासत संपत्तियों के हस्तांतरण को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने बुधवार (4 नवंबर 2026) को राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि वे राज्य की बहुमूल्य सरकारी जमीनें और ऐतिहासिक संपत्तियां निजी कंपनियों और बाहरी लोगों को कौड़ियों के भाव सौंप रहे हैं।
कांग्रेस का आरोप है कि इन फैसलों को आसानी से लागू करने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्णय लेने के सभी अधिकार कैबिनेट से छीनकर अपने हाथों में केंद्रित कर लिए हैं। पार्टी ने तुरंत सीएम धामी को पद से हटाने की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे राज्यपाल का दरवाजा खटखटाएंगे और जरूरत पड़ने पर न्याय के लिए अदालत का रुख भी करेंगे।
उत्तराखंड की प्रभारी और कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे मामले को विस्तार से रखा। उन्होंने दावा किया कि पूरे राज्य में लगभग 40 स्थानों पर जमीनें और संपत्तियां निजी संस्थाओं को दी जा रही हैं, जिससे राज्य की बहुमूल्य संपत्तियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों के हितों के साथ भी सीधा समझौता किया जा रहा है।
सैलजा के मुताबिक, मुख्यमंत्री अब ‘उत्तराखंड निवेश और बुनियादी ढांचा विकास बोर्ड’ (UIIDB) के अध्यक्ष के रूप में व्यक्तिगत स्तर पर इन बड़े सौदों को मंजूरी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री द्वारा हस्ताक्षरित केवल दो फैसलों के माध्यम से विभिन्न सरकारी विभागों की 1,080 एकड़ जमीन इस बोर्ड को हस्तांतरित कर दी गई है। इनमें ऋषिकेश में पूर्ववर्ती ‘इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड’ (IDPL) की 633 एकड़, मसूरी में 142 एकड़, 25 ब्रिटिशकालीन निरीक्षण बंगले और विकासनगर के डाकपत्थर में 190 एकड़ जमीन शामिल है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पटवा डांगर में 14 एकड़ जमीन निजी हाथों में मात्र 5 रुपये प्रति वर्ग मीटर के सालाना किराये पर दी जा रही है। इसके अलावा रामगढ़ में वन भूमि के प्रस्तावित हस्तांतरण पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
इन कथित अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस ने पूरे राज्य में ‘भूमि बचाओ, धामी हटाओ’ अभियान की शुरुआत कर दी है, जिसके तहत जगह-जगह उग्र प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट के हस्तांतरण के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हरिद्वार में अलकनंदा होटल जैसी ऐतिहासिक संपत्तियों को राज्य के बाहर के चहेते उद्योगपतियों को सौंपने के खिलाफ मोर्चा संभाला है।
चकराता से विधायक प्रीतम सिंह ने भी विकासनगर में डाकपत्थर की 180 एकड़ जमीन निजी कंपनियों को देने के प्रस्ताव के खिलाफ भारी भीड़ के साथ रैली निकाली और विधानसभा से लेकर सड़क तक एक सतत आंदोलन की चेतावनी दी। कांग्रेस ने ‘उत्तराखंड निवेश और बुनियादी ढांचा विकास बोर्ड अधिनियम’ की धारा 28 का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक संपत्ति के व्यवसायीकरण के लिए संबंधित विभागों और राज्य सरकार की सहमति अनिवार्य है, जिसे पूरी तरह दरकिनार किया गया है।
दूसरी ओर, सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने कांग्रेस के इन सभी आरोपों को सिरे से बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है। बीजेपी प्रवक्ता मनवीर सिंह चौहान ने सरकार का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि उत्तराखंड निवेश और बुनियादी ढांचा विकास बोर्ड को हस्तांतरित की गई सभी जमीनों का मालिकाना हक पूरी तरह से राज्य सरकार के पास ही सुरक्षित रहेगा।
उन्होंने बताया कि इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य राज्य में बाहरी निवेश को आकर्षित करना, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और टिकाऊ पर्यटन (सस्टेनेबल टूरिज्म) को बढ़ावा देना है। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इन संपत्तियों पर उसका पूर्ण विनियामक नियंत्रण (रेगुलेटरी कंट्रोल) बना रहेगा और एक निश्चित अवधि के बाद सरकार इन संपत्तियों को वापस अपने अधिकार में ले सकेगी।




