उत्तराखंड

उत्तराखंड की राजनीतिक और सामाजिक हलचल: धामी की ‘चाय पे चर्चा’, नेताओं का करवा चौथ और नए दल की चुनावी हुंकार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में अपने आधिकारिक तामझाम से अलग हटकर एक सादगी भरा पल बिताया, जिसने स्थानीय लोगों का दिल जीत लिया। जीवीके हेलीपैड से देहरादून की अपनी सड़क यात्रा के दौरान, उन्होंने श्रीनगर चुंगी के पास मंगल सिंह की चाय की दुकान पर अचानक रुकने का फैसला किया। वहां उन्होंने न केवल आम नागरिकों के साथ चाय का आनंद लिया, बल्कि छोटी बच्चियों, स्थानीय निवासियों और अपने अधिकारियों को खुद अपने हाथों से चाय परोसी।

मुख्यमंत्री ने दुकानदार और वहां मौजूद ग्राहकों से आत्मीय बातचीत भी की। उनका यह अघोषित ठहराव ‘वोकल फॉर लोकल’ (स्थानीय को बढ़ावा देने) का एक मजबूत संदेश दे गया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि छोटे व्यापारियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए किसी बड़ी घोषणा की प्रतीक्षा करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत एक कुल्हड़ चाय के साथ भी की जा सकती है।

हिंदू परंपरा में करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है, लेकिन इस वर्ष उत्तराखंड के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा में रहने वाली दो प्रमुख महिलाओं ने कथित तौर पर इस व्रत से दूरी बनाए रखी। राज्य की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने अपने पति गिरधारी लाल साहू के साथ चल रहे पारिवारिक विवादों के कारण इस बार करवा चौथ का व्रत नहीं रखा।

जब पत्रकारों ने इस विषय पर उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो वह बिना कोई जवाब दिए वहां से चली गईं। दूसरी ओर, अंकिता भंडारी मामले से जुड़े विवाद के चलते हरिद्वार जेल में बंद अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने भी व्रत नहीं रखा। बताया जाता है कि जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पूर्व विधायक सुरेश राठौर का नाम लेकर जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया।

आगामी 2027 के उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी कड़ी में ‘सर्वजन सनातन पार्टी’ ने राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। इस नई पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के पूर्व निदेशक एम. नागेश्वर राव हैं। पार्टी ने सनातन संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सांस्कृतिक पहचान को अपना मुख्य एजेंडा बनाया है।

नागेश्वर राव का मानना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और पहचान किसी भी समाज के चार प्रमुख आधार होते हैं। उन्होंने इन चारों स्तंभों को गाय के प्रतीक से जोड़ते हुए स्पष्ट किया कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वे राज्य में गाय को ‘राज्य माता’ का दर्जा दिलाएंगे और राष्ट्रीय स्तर पर इसे ‘राष्ट्र माता’ घोषित करवाने की दिशा में काम करेंगे। इसके साथ ही, राव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सनातन संस्कृति का इस्तेमाल केवल अपने राजनीतिक लाभ के लिए करने का तीखा आरोप भी लगाया है।

Related Articles

Back to top button