
कानपुर के हनुमंत विहार थाना क्षेत्र से एक बेहद खौफनाक और बर्बर हत्याकांड का मामला सामने आया है। पुरानी रंजिश के चलते कार सवार हमलावरों ने अर्रा निवासी 37 वर्षीय बीरू सिंह भदौरिया को अमानवीय यातनाएं देकर मौत के घाट उतार दिया। मंगलवार रात दशहरे का मेला देखकर लौट रहे बीरू को हमलावरों ने पहले होंडा अमेज कार से टक्कर मारी और फिर लात-घूंसों से पीटा।
क्रूरता की हद पार करते हुए आरोपियों ने उसे कार की छत पर पेट के बल लिटाया, उसकी दोनों हाथों की उंगलियों को कार के दोनों तरफ के शीशों में फंसाकर दबा दिया और इसी हालत में करीब डेढ़ किलोमीटर तक तंग गलियों में तेजी से कार दौड़ाई। अंत में राजेंद्रनगर में एक सुनसान जगह पर उसे कार से नीचे गिराकर रौंद दिया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
इस जघन्य हत्याकांड में पुलिस की कार्यप्रणाली और घोर लापरवाही भी सवालों के घेरे में है। दो दर्जन से अधिक सीसीटीवी कैमरों में वारदात कैद होने और परिजनों द्वारा आरोपियों के नाम दिए जाने के बावजूद, पुलिस इसे एक साधारण सड़क हादसा साबित करने में जुटी रही।
थाना प्रभारी ने तर्क दिया कि शायद चालक को पता ही न चला हो कि छत पर कोई है। घटना के 18 घंटे बीत जाने के बाद जाकर पुलिस ने पांच ‘अज्ञात’ लोगों के खिलाफ मामूली धाराओं में एफआईआर दर्ज की। मृतक के शरीर पर मौजूद चोट के निशान और शीशे में दबने से बुरी तरह पिचक चुकी उंगलियां पुलिस के इस खोखले दावे की पोल खोल रही थीं।
मृतक के पिता रामशंकर के अनुसार, कुछ दिन पहले ही खाड़ेपुर नई बस्ती के दो युवकों से बीरू का विवाद हुआ था। पुलिस के हस्तक्षेप से समझौता तो हो गया था, लेकिन आरोपी भीतर ही भीतर खुन्नस पाले हुए थे और मौका मिलते ही उन्होंने इस दुस्साहसिक वारदात को अंजाम दिया।
परिजनों के भारी हंगामे और विरोध के बाद प्रशासन दबाव में आया है। डीसीपी साउथ दीपेंद्रनाथ चौधरी ने स्पष्ट किया है कि परिजनों की दूसरी नामजद तहरीर को विवेचना का हिस्सा बनाया जा रहा है। सर्विलांस और साइबर सेल की मदद से आरोपियों और इस्तेमाल की गई कार की लोकेशन फतेहपुर के जहानाबाद में ट्रेस हुई है, जिसके बाद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए कई पुलिस टीमें गठित कर दी गई हैं।



